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हरियाणा में जमानत पर चल रहे यौन उत्पीड़न के आरोपी को ही बना दिया लॉ अफसर, सरकार के फैसले पर मचा बवाल

Haryana News: हरियाणा की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब यौन उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में ज़मानत पर चल रहे भाजपा सांसद सुभाष बराला के बेटे विकास बराला को सहायक महाधिवक्ता (Assistant Advocate General - AAG) नियुक्त किया गया। यह जानकारी 18 जुलाई को जारी हुई एक आधिकारिक अधिसूचना के ज़रिए सामने आई।

विकास का नाम उन 97 अधिवक्ताओं की सूची में है, जिन्हें हरियाणा सरकार ने सहायक महाधिवक्ता, उप-महाधिवक्ता, वरिष्ठ उप-महाधिवक्ता और अतिरिक्त महाधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया है।

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हालांकि इस सूची में विकास बराला का नाम होने पर न केवल न्यायिक और राजनीतिक हलकों में बल्कि सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि वह अभी भी एक अदालत में चल रहे यौन उत्पीड़न केस में आरोपी हैं और ज़मानत पर बाहर हैं।

Vikas Barala Sexual Harassment Case: क्या है पूरा मामला?

यह मामला 5 अगस्त 2017 का है, जब चंडीगढ़ की सड़कों पर देर रात एक युवती का पीछा करने और गाड़ी में जबरन घुसने की कोशिश करने का आरोप विकास बराला और उसके दोस्त आशीष कुमार पर लगा था। इस मामले में पीड़िता थीं वरनिका कुंडू, जो कि हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वी.एस. कुंडू की बेटी हैं।

वरनिका ने आरोप लगाया था कि दोनों युवकों ने देर रात उनकी गाड़ी का पीछा किया और उसे बार-बार रोकने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उन्होंने गाड़ी का रास्ता रोककर उसमें जबरन घुसने की भी कोशिश की। पीड़िता की शिकायत पर चंडीगढ़ के सेक्टर 26 पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

इन धाराओं में हुआ था मामला दर्ज

पुलिस ने विकास और आशीष पर IPC की धारा 354D (पीछा करना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 365 (अपहरण का प्रयास), 511 (अपराध की कोशिश) और नशे में गाड़ी चलाने के आरोपों में मामला दर्ज किया था। 9 अगस्त 2017 को दोनों की गिरफ्तारी हुई और अक्टूबर 2017 में उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए गए। उस समय हरियाणा में भाजपा की सरकार थी और विकास के पिता सुभाष बराला राज्य के भाजपा प्रमुख थे।

गिरफ्तारी के बाद विकास बराला को चंडीगढ़ की मॉडल जेल, बुरैल में रखा गया था। बाद में जनवरी 2018 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी थी। फिलहाल वह जमानत पर हैं, और मामला चंडीगढ़ की एक अदालत में अब भी विचाराधीन है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है, जिसमें बचाव पक्ष के गवाहों की गवाही दर्ज की जाएगी।

कानून का छात्र था विकास

इस घटना के समय विकास बराला कानून का छात्र था और अदालत की अनुमति से दिसंबर 2017 में उसे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री की परीक्षा देने की इजाजत भी मिली थी। विकास के पिता सुभाष बराला ने हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष के रूप में दिसंबर 2014 से जुलाई 2020 तक कार्य किया।

हालांकि वे अक्टूबर 2019 में फतेहाबाद जिले की टोहाना सीट से विधानसभा चुनाव हार गए थे। बाद में उन्हें हरियाणा ब्यूरो ऑफ पब्लिक एंटरप्राइज़ेज का अध्यक्ष बनाया गया। फरवरी 2024 में उन्हें हरियाणा से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया।

नियुक्ति पर उठे सवाल

इस नियुक्ति ने एक बार फिर राजनीतिक नैतिकता, कानून और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां सरकार यह कह सकती है कि नियुक्ति योग्यताधारित है, वहीं दूसरी ओर आरोपित व्यक्ति को सरकारी कानून अधिकारी बनाए जाने से लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।

कई कानून विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी है कि जब एक गंभीर आपराधिक मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में हो, तो ऐसे व्यक्ति को सरकारी पद देने से संदेह की स्थिति पैदा होती है। इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक हरियाणा सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय या भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक गर्मी बढ़ा सकता है, खासकर जब विपक्ष इस नियुक्ति को लेकर हमलावर रुख अपनाए।

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