Haryana News: जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कार्यशाला आयोजित, कुलपति ने कही यह बात
Haryana News: हरियाणा के जेसी बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ द्वारा छात्र कल्याण कार्यालय तथा संचार और मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग एवं विज्ञान भारती हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा-एक भावी रूपरेखा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर ने कहा कि भारतीय ज्ञान का उद्गम हमारे वेद है। जिनमें सभी तरह के ज्ञान का समावेश है। लेकिन हमारे वेदों में निहित ज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का हमारी आधुनिक शिक्षा में समावेश नहीं हो पाया है। जिस कारण नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के साथ जोड़ने की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा समावेशिता और पहुंच को प्राथमिकता देती है तथा यह सुनिश्चित करती है कि शिक्षा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं से परे हो। प्रत्येक छात्र को उनकी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्राप्त हो। भारतीय ज्ञान परम्परा अधिक न्यायसंगत और समावेशी समाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जो विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्रों को अपने शैक्षिक प्रयासों में आगे बढ़ने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय दुधौला के कुलपति राज नेहरू ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा धर्म तथा कर्म की परम्पराओं में निहित रही है। हमारे पूर्वजों ने शिक्षा एवं शिक्षा व्यवस्था को प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा। पाश्चात्य विचारधारा ने शिक्षा को मुख्य रूप से बाह्य सुख से जोड़ा। जबकि भारतीय शिक्षा परम्परा ने आंतरिक सुख को प्राथमिकता दी। भारतीय शिक्षण परम्पराओं में चतुरंग और मोक्षपातम के खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि ये खेल संस्कार तथा विचार क्षमता को विकसित करने के रूप में भारतीय शिक्षा परम्पराओं का हिस्सा रहे। उन्होंने कहा कि अनेकों आघात के बावजूद यदि कोई ज्ञान परम्परा स्थाई रूप से विद्यमान रही तो यह भारतीय ज्ञान परम्परा ही है। कार्यशाला के मुख्य वक्ता हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बृज किशोर कुठियाला रहे।












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