Haryana DSP: गृहमंत्री अनिल विज और ADG अलग-अलग बातें क्यों बोल रहे हैं ?
नूंह, 19 जुलाई: हरियाणा में खनन माफिया कितने बेखौफ हैं, उसका आज प्रमाण मिल गया। चार महीने बाद रिटायर हो रहे एक पुलिस अफसर ने सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाने की कोशिश की तो उसे खनन माफिया ने डंपर से कुचल डाला। हरियाणा के जिस नूंह जिले में यह वारदात हुई है, वह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं है। इस घटना ने ना सिर्फ राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाया है, बल्कि खनन माफिया के पूरे देश में बेखौफ होने का एक और सबूत पेश किया है। क्योंकि, दूसरे राज्यों में ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिसमें खनन माफियाओं ने पुलिस अफसरों को कुचलने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई है। लेकिन, दिक्कत ये है कि इतने गंभीर मामले पर भी हरियाणा पुलिस के आला अधिकारी और राज्य के गृहमंत्री के बयानों में तालमेल की कमी नजर आ रही है।

बिना बैकअप फोर्स के थे- एडीजी
हरियाणा के नूंह जिले में तावडू के डीएसपी सुरेंद्र सिंह को खनन माफिया के हाथों हुई खौफनाक हत्या पर हरियाणा के गृहमंत्री और राज्य पुलिस के एडीजी की बातों में जरा अंतर नजर आ रहा है। साउथ रेंज के आईजी, एडीजी रवि किरण ने घटना के बारे में कहा है कि 'वे एक गुप्त सूचना के आधार पर औचक निरीक्षण के लिए आए थे। बिना बैकअप फोर्स के आए थे, शायद उनके पास इसके लिए (फोर्स जुटाने के लिए) समय नहीं रहा होगा। आरोपी ने उन्हें कुचल दिया। किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ।' एडीजी का दावा और हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज के बयान में अंतर नजर आ रहा है।

उनके साथ पूरी पुलिस टीम मौजूद थी- अनिल विज
हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने यह तो कहा है कि उन्होंने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की भी बात की है और कहा है कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन, एडीजी के दावे से अलग उन्होंने ये कहा है कि, 'जब डीएसपी की हत्या की गई थी, तब उनके साथ पूरी पुलिस टीम मौजूद थी। वे वहां पर छापा डालने के लिए गए थे। हरियाणा डीजीपी पहुंचने वाले हैं और पूरी घटना पर नजदीकी नजर रख रहे हैं।' सवाल उठता है कि जब पूरी टीम उनके साथ थी तो आरोपी भागने में कैसे सफल हो गया?

हमने पहले ही सिस्टम को सख्त कर दिया है- गृहमंत्री
बहरहाल हरियाणा के गृहमंत्री ने कहा है कि 'हमने पहले ही सिस्टम को सख्त कर दिया है। हर दिन हम पूरे हरियाणा में एक मुहिम चलाते हैं और कल ही करीब 400-425 असामाजिक तत्वों को पकड़ा गया था। हम समय-समय पर ऐसी मुहिम चलाते हैं। मैं खुद ही इसकी हर हफ्ते निगरानी करता हूं, अधिकारियों से निजी तौर पर प्रगति के बारे में पूछता हूं। ' अनिल विज ने कहा, 'पुलिस कर्मियों को बैंक से 50 लाख रुपए दिए जाते हैं और सरकार भी दिवंगत डीएसपी के परिवार को 50 लाख रुपए देगी।' लेकिन, खनन माफिया कोई सामान्य अपराधी टाइप लोग नहीं हैं, अगर यह बात हरियाणा पुलिस को पता होता तो एक डीएसपी को इस तरह से अपनी जान नहीं देनी पड़ती। अगर सिस्टम इतना सख्त था, तो उस डंपर ड्राइवर के हाथ पुलिस वाले को कुचलते समय कांपे क्यों नहीं?

मेरी आज ही उनसे बात हुई थी- दिवंगत पुलिस अफसर के भाई
इस बीच दिवंगत डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई के छोटे भाई ने बताया है कि उनके दो बच्चे हैं और वह इसी साल रिटायर होने वाले थे। तावडू के डीएसपी के छोटे भाई अशोक मंजू ने बताया है कि 'मैंने आज ही उनसे बात की थी। वे इस साल रिटायर होने वाले थे। उनके दो बच्चे हैं।' इस मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पहले ही शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, 'डीएसपी तावडू (नूंह) सुरेंद्र सिंह जी की हत्या के मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए हैं। एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा....शोकाकुल परिजनों के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं हैं...... ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।' मुख्यमंत्री खट्टर ने डीएसपी सुरेंद्र सिंह को शहीद का दर्जा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भी ऐलान किया है।

डंपर को रुकने को कहा तो ड्राइवर ने डीएसपी को कुचल डाला
घटना नूंह जिले के पचगांव इलाके की है। डीएसपी सुरेंद्र सिंह अवैध खनन माफिया की जांच करने पहुंचे थे। पुलिस के मुताबिक जब उन्होंने देखा कि एक डंपर तेजी से अरावली की तरफ से आ रहा है तो वे अपनी पुलिस गाड़ी से बाहर उतर गए। उनके सहकर्मी और पुन्हाना के डीएसपी शमशेर सिंह ने कहा कि 'उन्होंने ड्राइवर को रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने अधिकारी पर ट्रक चढ़ा दिया।' डीएसपी सुरेंद्र सिंह को कुचलने के बाद ट्रक ड्राइवर तुरंत फरार हो गया। पुलिस अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई। शमशेर सिंह के मुताबिक 'वह (दिवंगत डीएसपी ) पहले भी अवैध रेत, पत्थर ढोने वाले कई डंपरों को जब्त कर चुके थे और कार्रवाई चल ही रही थी।'












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