Haryana: हार के बाद भी कांग्रेस में हुड्डा का जलवा,CLP नेता के चुनाव से पहले 31 MLA ने की मुलाकात
हरियाणा में कांग्रेस के 38 में से 31 विधायकों ने पार्टी विधायक दल के नेता के चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की है। यह बैठक हुड्डा के आवास पर हुई और यह हरियाणा विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद विधायकों की पहली बैठक थी। कांग्रेस 90 में से केवल 38 सीटें ही हासिल कर पाई है।
हुड्डा के आवास पर उनसे मुलाकात करने वालों में में निर्मल सिंह, आफताब अहमद और विनेश फोगाट जैसे नवनिर्वाचित सदस्य शामिल थे। नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव की वकालत करने वाले कुछ नेताओं के बावजूद हुड्डा के समर्थकों ने उनके प्रति अपनी निष्ठा दिखाई है। यह चंडीगढ़ में नए नेता को चुनने के लिए निर्धारित कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक से पहले हुआ है।

कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण सीएलपी बैठक की निगरानी के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इनमें अशोक गहलोत, अजय माकन और प्रताप सिंह बाजवा जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं। उनकी भूमिका सभी विधायकों से बातचीत करना और संभावित नेतृत्व उम्मीदवारों पर उनके विचार एकत्र करना है।
उधर चुनावी शुचिता को लेकर चिंताओं के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस टीम में भूपेश बघेल, हरीश चौधरी और एस सेंथिल शामिल हैं। इनका काम 8 अक्टूबर को हुए हरियाणा चुनाव की मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में गड़बड़ी के आरोपों की जांच करना है।
कांग्रेस ने कम से कम 20 निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष मुद्दे उठाए हैं। उनका दावा है कि ज़्यादा बैटरी लेवल वाली ईवीएम ने भाजपा उम्मीदवारों के लिए बेहतर नतीजे दिखाए। इसके विपरीत, कांग्रेस उम्मीदवारों को कथित तौर पर 90 प्रतिशत से कम बैटरी लेवल वाली मशीनों से ज़्यादा वोट मिले।
वोट शेयर विश्लेषण से पता चला कि कांग्रेस को 39.09 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को 39.94 प्रतिशत वोट मिले।












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