Haryana Chunav: हरियाणा की ये 32 विधानसभा सीटें इस बार भी तय करेगी अगली सरकार?

Haryana Chunav 2024: हरियाणा में 2019 के विधानसभा चुनावों में करीब एक-तिहाई सीटों पर हार-जीत का अंतर बहुत ही कम रहा था। इस बार भी लग रहा है कि राज्य में अगली सरकार बनाने में उन्हीं 32 सीटों का रोल अहम हो सकता है। लेकिन, जिस तरह से इस बार जमीनी स्तर पर कुछ नए गठबंधन बनाए गए हैं, उससे नतीजे और भी चौंकाने वाले हो सकते हैं।

हरियाणा में 5 दलों और गठबंधनों में मुकाबला
हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटें हैं और इसके लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच बहुप्रचारित गठबंधन आखिरकार नहीं ही हो पाया है। मतलब, साफ है कि बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरी हैं तो उनके सामने जननायक जनता पार्टी और आजाद समाज पार्टी और आईएनएलडी और बीएसपी गठबंधन चुनौती बनकर खड़ी हैं।

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बहुकोणीय मुकाबले में भाजपा को मिल सकता है फायदा!
2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 में से 32 सीटों पर फैसला 10,000 से भी कम वोटों से हुआ था और जिस तरह से इस बार यहां के वोटों के पांच सियासी कुनबे दावेदार बन गए हैं, उससे परिणाम बहुत ही चौंकाने वाले हो सकते हैं। वैसे विपक्षी वोटों के बंटवारे का फायदा सत्ताधारी बीजेपी को मिलने की ज्यादा संभावना लग रही है, जिसने पिछली बार इन कड़े मुकाबले वाली सीटों में से 15 पर बाजी मारी थी।

सिरसा में मात्र 602 वोटों से आया था नतीजा
पिछली बार इन 32 सीटों में से आम आदमी पार्टी सिर्फ 18 पर लड़ रही थी, इस वजह से लगतका है कि इस बार वह और भी ज्यादा सीटों पर चुनौती बनकर उभर सकती है। इनमें सबसे कम 602 वोटों से सिरसा में नतीजा तय हुआ था, जहां लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा जीते थे।

कई सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा 'आप' को मिले थे वोट
यहां भाजपा तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर रही थी। 'आप' प्रत्याशी को कांडा की जीत के अंतर से ज्यादा वोट मिले थे। यही कहानी और भी सीटों में दोहराई गई थी, जहां हार-जीत के अंतर से ज्यादा आम आदमी पार्टी ने वोट जुटा लिए थे।

जाट-दलित वोटरों के पास कई सारे विकल्प
हरियाणा में 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इनकी आबादी करीब 19.35% है। राज्य में सबसे ज्यादा वोटर जाट हैं और उनके वोटों के दावेदारों में कांग्रेस, जेजेपी-आजाद समाज पार्टी और आईएनएलजी-बीएसपी गठबंधन भी शामिल हैं। इस तरह से प्रदेश में जाटों और दलितों को इस बार सीधे तौर पर तीन विकल्प मौजूद हैं और चौथे विकल्प में भाजपा को भी पूरी तरह से नकार देना राजनीतिक नासमझी ही मानी जा सकती है।

कम अंतर से हार-जीत वाली 32 सीटों में 6 सुरक्षित
अब गौर करने वाली बात है कि जिन कम अंतर पर हार-जीत वाली 32 सीटों की हमने बात शुरू की थी, उनमें से 6 सीटें सुरक्षित भी हैं। 2019 में हरियाणा में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। 90 विधायकों वाले सदन में बीजेपी 40 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और कांग्रेस 31 पर अटक गई थी। बीजेपी ने दुष्यंत चौटाला की जेजेपी के 10 विधायकों के समर्थन से करीब 5 वर्ष पूर्ण बहुमत की सरकार चलाई।

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