खतरे में इनाम? सामने आई दो IPS की दिल दहलाने वाली सच्चाई, अब एक्शन में गृहमंत्रालय

Haryana News: वीरता पुरस्कार के लिए हरियाणा सरकार ने 6 पुलिस अधिकारियों को नाम केंद्र सरकार के पास भेजे थे। लेकिन, अब सरकार द्वारा वीरता पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किए गए चार पुलिस अधिकारी जांच के घेरे में आ गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा सरकार दो आईपीएस और दो पुलिस अधिकारियों द्वारा किसानों पर की गई 'फायरिंग' का ब्यौरा मांगा है।

खबर के मुताबिक, यह वो पुलिसकर्मी है जिनके नाम की हरियाणा सरकार ने हाल ही में वीरता पदक के लिए सिफारिश की थी। क्योंकि, किसान आंदोलन के दौरान पंजाब से दिल्ली तक तरफ कूच कर रहे किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोका था। दरअसल, पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवान ने पीएम मोदी को पत्र लिखा था।

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पत्र में उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा इन पुरस्कारों की संस्तुति करने के फैसले पर पुन विचार करने की मांग की। हरियाणा सरकार के इस कदम पर उन्होंने कहा, 'इस तरह की कार्रवाई में शामिल अधिकारियों को वीरता पदक देना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।' खबर के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने हाल ही में छह पुलिस अधिकारियों के नाम केंद्र के पास भेजे थे।

साथ ही, सिफारिश की थी कि इन पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया जाए। जिसके बाद यह पूरा विवाद सामने आया। दरअसल, पिछले साल फरवरी महीने में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मांगों के समर्थन किसानों को दिल्ली की तरफ कूच किया था।

उस वक्त हरियाणा सरकार ने पंजाब के साथ अपनी सीमा पर शंभू और खनौरी पॉइंट पर बैरिकेड्स लगाए थे। आठ लेयर की सुरक्षा के चलते किसान आगे नहीं बढ़ पाए थे। इसी को आधार बनाते हुए सरकार ने गृह मंत्रालय को 6 पुलिस अधिकारियों के नाम 2 जुलाई को भेजे। डीजीपी शत्रुजीत कपूर से उनकी असाधारण बहादुरी और नेतृत्व के लिए के आधार पर ये नाम आगे बढ़ाए।

हालांकि, गृह मंत्रालय ने 8 जुलाई को हरियाणा के गृह विभाग को दो पत्र भेजे, जिसमें बताया गया कि ऑनलाइन आवेदन में सभी आवश्यक जानकारी शामिल नहीं की गई थी। मंत्रालय ने विशेष रूप से अनुशंसित अधिकारियों से जुड़ी गोलीबारी की घटनाओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले के बारे में विवरण मांगा।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने पाया कि CAPF के जवान राज्य की सीमाओं पर भी तैनात हैं, लेकिन इन बलों के अधिकारियों के लिए कोई सिफारिश नहीं की गई। गृह मंत्रालय के इस सवाल से हरियाणा सरकार मुश्किल में पड़ सकती है। क्योंकि, राज्य सरकार ने हमेशा कहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केवल आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलियां चलाईं।

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