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Gurmeet Ram Rahim Parole: गुरमीत राम रहीम रोहतक जेल से आए बाहर, 40 दिन की पैरोल में कहां डालेंगे डेरा?

Gurmeet Ram Rahim Parole: रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह फिर से बाहर निकल गए हैं। सोमवार को 40 दिन की पैरोल पर रिहा होकर सिरसा पहुंच गए। इस अवधि में वह सिरसा के डेरा मुख्यालय में रहेंगे और इस दौरान कोई सार्वजनिक सभा करने की अनुमति नहीं होगी। 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, सजायाफ्ता होने के दौरान यह उनकी 15वीं पैरोल या फरलो है।

राम रहीम सिंह को दो साध्वियों के रेप के अलावा एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। जेल में सजा काटते हुए उन्हें कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। इसका गुरुद्वारा कमेटी ने विरोध भी किया है। सोशल मीडिया पर भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

Gurmeet Ram Rahim Parole

Gurmeet Ram Rahim Parole: चुनाव से पहले भी मिली थी पैरोल

- डेरा प्रमुख को अगस्त 2025 में भी 40 दिन की पैरोल दी गई थी। इससे पहले अप्रैल 2025 में उन्हें 21 दिन की फरलो मिली थी। जनवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें 30 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया था।

- अक्टूबर 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले उन्हें 20 दिन की पैरोल मिली थी, जबकि अगस्त 2024 में 21 दिन की फरलो दी गई थी। लोकसभा चुनाव से पहले भी उन्हें जेल से बाहर आने का मौका मिला था।

- इससे पहले 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्हें तीन सप्ताह की फरलो दी गई थी।

Gurmeet Ram Rahim सिरसा में रहेंगे

पैरोल के दौरान गुरमीत राम रहीम सिरसा के डेरा मुख्यालय में रहेंगे। हरियाणा-पंजाब, राजस्थान और दिल्ली में उनके समर्थकों की बड़ी संख्या है। इसे देखते हुए राम रहीम को किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा करने की अनुमति नहीं है। वह राजनीतिक कार्यक्रमों में भी भाग नहीं ले सकते हैं और सोशल मीडिया से भी दूर रहने का निर्देश दिया गया है।

रेप और हत्या के मामले में राम रहीम दोषी करार

राम रहीम सिंह को 2017 में बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा 2019 में एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी उन्हें दोषी करार दिया गया था। हालांकि मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2002 में डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में सीबीआई अदालत के फैसले को पलटते हुए राम रहीम और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।

राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति सहित कई सिख संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गंभीर अपराधों में सजा पाए व्यक्ति को बार-बार राहत देना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

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