हरियाणा: पंचकूला से हजारों किसानों का राजभवन की तरफ मार्च, बेरिकेड तोड़े
हरियाणा: राज्यपाल को ज्ञापन देने के लिए हजारों किसानों का राजभवन की तरफ मार्च, भारी पुलिसबल तैनात
चंडीगढ़, 26 जून: केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के दिल्ली के बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन को आज सात महीने हो गए हैं। इस मौके पर देश में किसान आज राज्यपालों, उपराज्यपालों को ज्ञापन सौंप रहे हैं। कानूनों को वापस लेने की मांग करने वाला ज्ञापन राज्यपाल को सौंपने के लिए हरियाणा के पंचकूला से हजारों किसान राजभवन, चंडीगढ़ की तरफ मार्च कर रहे हैं। किसानों के पैदल मार्च को देखते हुए भारी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है। पुलिस के किसानों को रोकने पर टकराव के हालत पैदा हो गए और किसानों ने बेरिकेड भी तोड़ दिए। किसानों ने चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर भी बैरिकेड तोड़ दिए।

किसानों ने पहले ही ये ऐलान किया हुआ था कि 26 जून को देशभर में अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन दिए जाएंगे। सभी राज्यों में किसान ये ज्ञापन देंगे। हालांकि ज्यादातर जगहों पर कुछ किसान प्रतिनिधि ही ज्ञापन सौंप रहे हैं, वहीं पंचकूला में काफी तादाद में किसान सड़क पर उतरे हैं। वहीं दिल्ली और यूपी के बॉर्डर पर धरना दे रहे किसान भी आज आंदोलन कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से काफी संख्या में ट्रैक्टर यूपी गेट पहुंचे हैं।
बता दें कि केंद्र सरकार बीते साल जून में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों का आंदोलन जून, 2020 से नवंबर तक मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में चल रहा था। सरकार की ओर से प्रदर्शन पर ध्यान ना देने की बात कहते हुए 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली के लिए कूच कर दिया। इसके बाद 26 नवंबर, 2020 से देशभर के किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। दिल्ली के बॉर्डरों पर किसानों के धरने को अब सात महीने हो चुके हैं।












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