उप चुनाव: उम्मीदवारी के विरोध पर विकल पचार ने तोड़ी चुप्पी, राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव पर लगाए गंभीर आरोप
हरियाणा के सिरसा में उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं।
चंडीगढ़, अक्टुबर 7, 2021। हरियाणा के सिरसा में उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। ऐलनाबाद में 30 अक्टुबर को उपचुनाव होने वाले हैं। इस बार उपचुनाव में तीन कृषि कानून मुख्य मुद्दा है। ग़ौरतलब है कि इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में इस्तीफ़ा दिया था। अब दोबारा से वह उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी के तौर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। विकल पचार को हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के ने अपने उम्मीदवार के तौर सियासी मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने विकल पचार की उम्मीदवारी पर विरोध जताया है। उनका कहना है विकल पचार से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इस बाबत वन इंडिया हिंदी ने विकल पचार से बात की उन्होंने कहा सर्वसम्मति उन्हें हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं उन्होंने राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोग सियासी दलों से मिले हुए हैं। राजनीतिक पार्टियों से पैसे लेकर वह दोनो नहीं चुनावी मैदान में किसान नेता को प्रतिनिधित्व करने के लिए उतरने नहीं देना चाहते हैं।

उम्मीदवारी का विरोध
हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के जगबीर घसोला ने कहा कि अपने स्तर पर उम्मीदवार घोषित करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा से अपील की गई थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसलिए उन्होंने अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है ताकि किसानों की आवाज उठाया जा सके। वहीं हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदीप धनखड़ ने कहा कि ऐलनाबाद से अगर संयुक्त मोर्चा अपना उम्मीदवार उतारता है तो विकल पचार ऐलनाबाद उपचुनाव से अपना नाम वापस ले लेंगे। वहीं कालांवाली में किसान महापंचायत के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि विकल पचार की उम्मीदवारी पर संयुक्त किसान मोर्चा का कोई समर्थन नहीं है। साथ ही कहा कि किसानों के समर्थन में अभय चौटाला ने इस्तीफा दिया था। अभी तक मुद्दे का हल नहीं हुआ है, बावजूद इसके वह खुद चुनाव लड़ रहे हैं। अभय चौटाला को अपना फ़ैसला बदल कर किसान प्रत्याशी का समर्थन करना चाहिए।

अभय चौटाला ने दिया था इस्तीफ़ा
सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट इनेलो के विधायक अभय सिंह चौटाला के इस्तीफ़े की वजह से खाली हुई थी। ग़ौरतलब है कि अभय सिंह चौटाला ने तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ में ऐलनाबाद सीट से इस्तीफा दिया था। इनेलो से हरियाणा विधानसभा में सिर्फ़ एक वो ही विधायक थे। आपको बता दें कि अभय सिंह चौटाला ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पवन बेनीवाल को हराया था, हालांकि पवन बेनीवाल अब भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

ऐलनाबाद सीट का इतिहास
ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर आज तक दो बार उपचुनाव हो चुका हैं। वहीं 1967 से 2019 तक 15 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 13 बार सामान्य और 2 बार उपचुनाव शामिल है। गौर करने वाली बात है कि दोनों बार उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी ने ही ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। जिन्होंने दोना बार उपचुनाव में जीत दर्ज की उस प्रत्याशी का नाम अभय चौटाला है। आपको बता दें कि सबसे ज़्यादा बार जो यहां से विधायाक रहे उनका नाम भागी राम थे और वह इनेलो की टिकट पर 5 बार जीते थे। 1977 में भागीराम ने निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव हराया था।

अभय चौटाला ने लगातार दर्ज की जीत
ऐलनाबाद विधानसभा सीट साल 1977 में आरक्षित हो गई थी और उसके बाद 2005 तक ऐलनाबाद विधानसभा आरक्षित ही रही। आपको बता दें कि ओमप्रकाश चौटाला ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की उसके बाद 2010 में हुए उपचुनाव में अभय सिंह चौटाला ने जीत दर्ज की। अभय सिंह चौटाला ऐलनाबाद से 2009, 2014, 2019 में जीत की हैट्रिक लगा चुके है। वहीं बीजेपी के पवन बेनीवाल दूसरे नंबर पर रहे थे हालांकि पवन बेनीवाल अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। आपको बता दें कि ऐलनाबाद सीट पर 30 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 2 नवंबर को नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव में इस बार भी इनेलो उम्मीदवार अभय सिंह चौटाला ही होंगे।
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