Shani Jayanti 2026: शनि देव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल? क्या है पूजा विधि?
Shani Jayanti 2026: आज शनि जयंती है, जो कि हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, जो मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
शनि जयंती पर विशेष पूजा, दान और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम होने की मान्यता है। इस दिन शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ृाया जाता है, जिसके पीछे एक खास वजह है।

इस बारे में काशी के पंडित दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा बहुत प्राचीन है। इसके पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, एक कथा के मुताबिक जब भगवान हनुमान और शनि देव के बीच युद्ध हुआ, तब हनुमान जी ने शनि देव को पराजित कर दिया था।'
हनुमान जी शनिदेव के घावों पर लगाया था तेल
'युद्ध में घायल होने के बाद शनि देव के शरीर में अत्यधिक पीड़ा होने लगी। तब हनुमान जी ने उनके घावों पर तेल लगाया, जिससे उन्हें राहत मिली। तभी से शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई जो आज तक चली आ रही है।'
'सरसों का तेल शनि ग्रह की उग्रता को शांत करता है'
दयानंद शास्त्री ने कहा कि ' वैसे ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को धीमी गति और गंभीर प्रभाव वाला ग्रह माना जाता है। सरसों का तेल शनि ग्रह की उग्रता को शांत करता है। मान्यता है कि शनि जयंती पर तेल चढ़ाने से शनि दोष कम होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।'
शनि जयंती का महत्व
शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है।इस दिन पूजा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलने की मान्यता है। नौकरी, व्यापार और आर्थिक समस्याओं में सुधार के लिए यह दिन विशेष माना जाता है। न्याय, अनुशासन और कर्म के महत्व को समझाने वाला यह पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास होता है।गरीबों, जरूरतमंदों और श्रमिकों की सहायता करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
शनि जयंती पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण करें।पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें और शनि देव की कृपा प्राप्ति की प्रार्थना करें। पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।सरसों का तेल, काला तिल, नीले या काले फूल, उड़द दाल और काला कपड़ा शनि देव को अर्पित करें और पूजा के दौरान "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। आज के दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
शनि जयंती पर क्या करें और क्या ना करें?
गरीबों को भोजन कराएं,काले तिल और तेल का दान करें, कौवे और काले कुत्ते को भोजन दें, बुजुर्गों और श्रमिकों का सम्मान करें, किसी का अपमान न करें, झूठ और छल से बचें,मांस-मदिरा का सेवन न करें और पीपल वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं।














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