बीजेपी हरियाणा में भी अपना सकती है MP वाला फॉर्मूला? चुनाव में कई दिग्गज उतारने के कयास
Haryana assembly poll, हरियाणा में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। राज्य में मतदान 1 अक्टूबर को होना है, तथा परिणाम 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई दिग्गज नेता टिकट के लिए होड़ में हैं। पार्टियां भी टिकटों को लेकर लगातार रणनीति बना रही है।
माना जा रहा कि, पार्टियां हाल के लोकसभा चुनाव परिणामों, एंटी-इकंबेंसी, नेता की छवि समेत कई फैक्टर्स के आधार पर रणनीति बना रही हैं। लेकिन बीजेपी एक अन्य फॉर्मूले पर काम कर रही है। हरियाणा में तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी बीजेपी मध्य प्रदेश के फॉर्मूले को लागू करने पर विचार कर रही है,। जिसमें अपने प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारना शामिल है।

इस रणनीति ने मध्य प्रदेश में सकारात्मक परिणाम दिए है। ऐसे में भाजपा हरियाणा में भी इस अचूक फॉर्मूले के लागू करने की कोशिश कर रही है। मध्य प्रदेश में भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, फगन सिंह कुलस्ते और प्रहलाद पटेल को विधानसभा चुनाव में उतारा था।
इसके अलावा, वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और सांसद रीति पाठक, राकेश सिंह, उदय राव प्रताप सिंह और गणेश सिंह को भी टिकट दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि हरियाणा में भी इस रणनीति को सफलतापूर्वक दोहराया जा सकता है।
हरियाणा के चुनावी समर में भाजपा ने अपने अधिकांश दिग्गजों को उतारने का फैसला किया है। कुछ विधानसभा सीटों पर पार्टी के प्रमुख नेताओं के रिश्तेदार भी चुनाव लड़ सकते हैं। यह प्रयोग मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किए गए प्रयोग की तरह ही है, जहां इसके अच्छे नतीजे सामने आए थे। भाजपा ने राजस्थान में भी सात सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिए थे।
भाजपा के करीब आधा दर्जन नेता अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट मांग रहे हैं। पहले ऐसा करने में छिछक रही बीजेपी अब हर किसी भी कीमत पर सीट हासिल करने के लिए इन अनुरोधों पर विचार करना चाह रही है। यह बदलाव चुनावी लाभ को अधिकतम करने के लिए एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखे जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह अपनी बेटी आरती राव, कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे, सांसद धर्मवीर अपने भाई या बेटे, कुलदीप बिश्नोई अपने बेटे, रमेश कौशिक अपने भाई, विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता अपने भतीजे के लिए टिकट मांग रहे हैं।
फीडबैक और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया
हरियाणा में सीट-टू-सीट मार्किंग करने में जुटी हुई है। हरियाणा में भाजपा ने जिला पर्यवेक्षकों के माध्यम से टिकट के दावेदारों के बारे में फीडबैक जुटा लिया है। प्रदेश संगठन मंत्री फणींद्रनाथ शर्मा ने 90 विधानसभा सीटों के लिए करीब 2700 नामों की रिपोर्ट सौंपी है। इन उम्मीदवारों के नामों की सूची बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
हर विधानसभा सीट के लिए कम से कम दो और अधिकतम चार नामों का पैनल तैयार किया जा रहा है। कुछ सीटों पर एक ही नाम का पैनल हो सकता है। पिछले लोकसभा चुनावों में एक नाम वाले पैनल में भी आलाकमान की ओर से अतिरिक्त नाम शामिल करने की जरूरत पड़ती थी।
आगामी बैठकें और उम्मीदवार का अंतिम चयन
भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति 22 और 23 अगस्त को गुरुग्राम में होने वाली बैठक में इन सभी नामों पर चर्चा करेगी। इसके बाद 23 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी, जिसमें प्रदेश समिति की सिफारिशों के आधार पर करीब तीन दर्जन उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे। उम्मीदवारों को प्रचार और जनसंपर्क के लिए अधिक समय मिल सके, इसके लिए पार्टी टिकटों का ऐलान जल्द कर सकती है।
पहली सूची में उन उम्मीदवारों के नाम होंगे जिनके जीतने की संभावना अधिक है। दूसरी सूची पर बाद में विचार-विमर्श किया जाएगा। चूंकि नामांकन 5 सितंबर से शुरू हो रहे हैं, इसलिए भाजपा का लक्ष्य विधानसभा उम्मीदवारों की सूची समय पर जारी करना है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सात सांसदों को टिकट दिया था। लेकिन हरियाणा में पार्टी को सिर्फ पांच लोकसभा सीटें ही मिलीं। इसलिए यहां कोई भी मौजूदा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा, बल्कि लोकसभा चुनाव हार चुके उम्मीदवारों पर विचार किया जा सकता है।
हरियाणा में 2019 के विधानसभा चुनाव में हारे प्रमुख नेताओं को इस बार एक और मौका मिल सकता है। भाजपा को उम्मीद है कि दूसरे राज्यों की सफल रणनीतियों को दोहराने से उन्हें हरियाणा में एक बार फिर जीत हासिल करने में मदद मिलेगी।












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