छोटे किसान क्या करें? हरियाणा में पराली जलाने के मुद्दे पर ये बोले हुड्डा, इन्हें ठहराया जिम्मेवार
दिल्ली और आस-पास के इलाकों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने पराली जलाने वालों पर सख्त दंड लगाने का फैसला लिया है। हाल ही में सरकार ने जो आदेश जारी किया है उसमे कहा गया है कि पराली जलाते हुए पकड़े जाने पर व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही अगले दो सीजन तक फसल बेचने पर रोक लगा दी जाएगी। सरकार के इस फैसले का हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह गलत निर्णय है, इसे तत्काल वापस लेना चाहिए।

भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा, छोटे किसान जो हैं, जिनके पास एक एकड़ या दो एकड़ खेत है, वो पराली का क्या करेगा। उसे पराली का बंडल बनाना हैं तो मशीन की जरूरत है, जो वो ले नहीं सकता है। वह किराए पर अगर मशीन को लाता है तो वह एक हजार रुपए लेगा और पराली भी ले जाएगी, यह गलत है।
किसान की फसल ना खरीदना और कड़े कानून की बजाए समाधान ढूंढ़ना चाहिए। पराली की एमएसपी तय की जानी चाहिए। पराली के कई सारे उपयोग हो सकते हैं। इससे बिजली बन सकती है। इससे बिजली बनाएं और कहीं जगह इसका इस्तेमाल कीजिए, किसान को मत परेशानन कीजिए। यह गलत फैसला है, सरकार को इसे वापस लेना चाहिए।
कृषि मंत्री की अपील
बता दें कि हरियाणा के कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने किसानों से पराली निपटान के वैकल्पिक समाधान प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "सरकार ने पराली जलाने की व्यवस्था करने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। आपको उन योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए,"
पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई
हरियाणा के कृषि विभाग ने पराली जलाने के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि ऐसा करने वालों पर न केवल कानूनी कार्रवाई होगी बल्कि उनके कृषि रिकॉर्ड में लाल निशान भी दर्ज किया जाएगा।
यह रिकॉर्ड उन्हें अगले दो फसल सत्रों के लिए मंडियों में ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से अपनी फसल बेचने से रोकेगा। इस कदम का उद्देश्य पराली जलाने पर प्रतिबंध के पालन को प्रोत्साहित करना है, इसके लिए भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
आप पर बरसी कांग्रेस
गौर करने वाली बात है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार करने में विफल रहने के लिए आम आदमी पार्टी की आलोचना की है।
खेड़ा ने बताया कि 15 वर्षों में दिल्ली के पर्यावरण को बेहतर बनाने के प्रयासों के बावजूद, जिसमें स्वच्छ वाहन ईंधन के रूप में सीएनजी को शामिल करना और हरित क्षेत्र को बढ़ाना शामिल है, हाल के वर्षों में वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी गई है। उन्होंने दिल्ली सरकार पर हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों पर दोष मढ़ने का आरोप लगाया।












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