'चुनाव नजदीक आए तो पीछे हटी सरकार, जो 700 किसान शहीद हुए उनका हिसाब कब देंगे'
कुरुक्षेत्र। सालभर से आंदोलनरत किसान-प्रदर्शनकारियों के हठ के आगे सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला ले लिया। जिससे किसान-प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, कुछ किसान नेता सरकार से अभी खफा हैं। किसान नेताओं का कहना है कि, विभिन्न परिस्थितियों में महीनों से घर से दूर रहे अन्नदाता के साथ सरकार ने क्यों बुरा बर्ताव किया। जो किसान कृषि कानूनों का विरोध करते हुए मरे हैं, उनके आश्रितों को सरकार क्या सफाई देगी। कुछ ऐसी ही बात किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की पत्नी बलविंदर कौर ने कही।

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चढूनी की पत्नी बलविंदर कौर ने कुरुक्षेत्र में कहा कि, चुनाव आ रहे हैं तो सरकार ने कानून वापसी का ऐलान कर दिया..लेकिन ये सरकार उनके लिए क्या बोलेगी जो किसान शहीद हुए हैं। बलविंदर कौर बोलीं, "हमारी लड़ाई अभी जारी रहेगी। 700 किसानों की जानें गई हैं...उनका हिसाब सरकार को देना होगा। और, जब तक कृषि कानूनों को लिखित में रद्द नहीं किया जाता और जब तक एमएसपी की गारंटी नही मिलती तब तक किसान धरनास्थलों को खाली नहीं करेंगे। वहीं, किसान नेता गुरनाम सिंह बोले कि, कृषि कानून रद्द होने से ही किसानों की समस्या दूर नहीं होगी, हमें बहुत कुछ करना होगा। हमारी मांगें पूरी करनी होंगी।

गुणी प्रकाश बोले-23 प्रदेशों के किसान लड़ाई लड़ेंगे
वहीं, भारतीय किसान यूनियन मान ग्रुप के प्रदेश अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने कहा कि..ये कानून वापसी का ऐलान समस्या का पूरा समाधान नहीं है। हम दोबारा से आंदोलन खड़ा करेंगे। जो अराजकता फैलाई गई उसका क्या? 23 प्रदेशों के किसान संगठन इस आंदोलन को लेकर लड़ाई लड़ेंगे। एमएसपी वाला कानून लागू करवा कर रहेंगे।












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