हरियाणा में बिजली निगमों की वित्तीय स्थिति पर AAP ने उठाए सवाल, सुधार और पारदर्शिता की मांग
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा के बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हरियाणा राज्य के बिजली वितरण निगमों पर ₹27,915 करोड़ का संचित घाटा है और कुल उधारी ₹20,311 करोड़ तक पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि ये आंकड़े संकेत देते हैं कि बिजली क्षेत्र में व्यापक वित्तीय सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में आम उपभोक्ता महंगे टैरिफ, फिक्स्ड चार्ज और बढ़ते बिजली बिलों से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि बिजली व्यवस्था को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और भविष्य में वित्तीय बोझ कम हो।

ढांडा ने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2600 करोड़ का लाभ दर्ज किया है। साथ ही राष्ट्रीय रैंकिंग में PSPCL को A+ ग्रेड के साथ दूसरा स्थान मिला है। उनके अनुसार यह दर्शाता है कि बेहतर प्रबंधन और स्पष्ट नीति से बिजली क्षेत्र को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने "रोशन पंजाब मिशन" का जिक्र करते हुए कहा कि 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना से पंजाब में 90 प्रतिशत से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली है। उनका कहना है कि जनहितकारी योजनाओं के साथ वित्तीय अनुशासन भी संभव है, यदि नीति और क्रियान्वयन स्पष्ट हो।
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि हरियाणा सरकार बिजली निगमों की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करे, ताकि जनता के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। ढांडा ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही से ही बिजली क्षेत्र को स्थिर और मजबूत बनाया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।












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