ग्वालियर में पति की मौत के बाद उत्तराधिकारी को लेकर पत्नी और वो के बीच फंसा मामला

ग्वालियर में प्रधान आरक्षक की मौत के बाद उत्तराधिकारी को लेकर पत्नी और प्रेमिका पहुंचे कोर्ट

ग्वालियर, 13 सितंबर। पति-पत्नी और वो के मामले में पति की मौत के बाद अब पत्नी और वो के बीच मामला फंस कर रह गया है। पति की मौत के बाद पति के उत्तराधिकारी के लेकर पत्नी और वो के बीच का विवाद कोर्ट तक पहुंच गया है। स्थिति यह हो गई है पुलिस विभाग ने साफ शब्दों के दिया है कि कोर्ट से जो भी उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र लाएगा वही उत्तराधिकारी होगा।

पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ है पूरा मामला

पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ है पूरा मामला

पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ रहे अवधेश सिंह के उत्तराधिकार को लेकर पत्नी और वो के बीच घमासान मचा हुआ है। अवधेश सिंह की मृत्यु साल 2016 में हो गई थी इसके बाद विभाग की तरफ से अवधेश सिंह के उत्तराधिकारी को बीमा धन और जीपीएफ का छह लाख से ज्यादा रुपया मिलना था। इसके लिए अवधेश सिंह की पत्नी साधना सिंह ने आवेदन भी लगाया लेकिन मामले में उस वक्त पेंच आ गया जब ममता नाम की महिला ने इस आवेदन पर आपत्ति जाहिर कर दी।

ममता ने खुद को बताया अवधेश सिंह का उत्तराधिकारी

ममता ने खुद को बताया अवधेश सिंह का उत्तराधिकारी

ममता ने खुद विभाग में इस बात की जानकारी दी है कि अवधेश सिंह की मौत के बाद उनकी उत्तराधिकारी खुद ममता है क्योंकि अवधेश सिंह की जब मौत हुई तो वे ममता के साथ रहते थे> यही वजह है कि ममता ने उत्तराधिकारी के तौर पर खुद को बताते हुए विभाग से मिलने वाले पैसे के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी।

विभाग ने खड़े किए हाथ

विभाग ने खड़े किए हाथ

साधना और ममता द्वारा खुद को उत्तराधिकारी बताने के मामले में विभाग भी परेशान हो गया। पुलिस विभाग ने इसका एक रास्ता निकाला और पुलिस विभाग ने ममता और साधना से दो टूक कह दिया कि जो भी कोर्ट से उत्तराधिकारी का प्रमाण पत्र लाएगा पैसा उसी को दिया जाएगा।

अब न्यायालय में चल रहा है मामला

अब न्यायालय में चल रहा है मामला

अवधेश सिंह की पत्नी साधना खुद को अभी तक उत्तराधिकारी साबित नहीं कर पाई है। उधर अवधेश सिंह के साथ रहने वाली ममता भी खुद के उत्तराधिकारी साबित नहीं कर पाई है लेकिन दोनों इस मामले को लेकर कोर्ट में पहुंच गए हैं। कोर्ट में मामला लंबित है और यही वजह है कि आरक्षक अवधेश की मौत के बाद भी उसके असली उत्तराधिकारी को बीमा धन और जीपीएफ का पैसा नहीं मिल सका है। मामला पत्नी और वो के बीच फंस कर रह गया है।

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