OMG: भाई से झगड़ा हुआ तो बहन ने हाथ में पकड़ा मोबाइल गटक लिया, एक्स-रे देख डॉक्टरों के उड़े होश
भिंड जिले के अमायन क्षेत्र की रहने वाली 18 वर्षीय अन्नू ने परिवार की किसी बात से नाराज होकर यह कदम उठाया था। युवती के मोबाइल निगलने के बाद उसे अस्पताल लाया गया।

मध्यप्रदेश के भिंड जिले से एक अजीब मामला सामने आया है। भाई-बहन में लड़ाई के समय बहन ने एक की-पेड मोबाइल निगल लिया। युवती 18 वर्ष की है। शुक्रवार को घटना के बाद युवती को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में एडमिट कराया गया। उसके पेट से मोबाइल को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए आपातकालीन सर्जरी की गई है।
इस मामले से परिजन हैरान हैं। दरअसल, लड़ाई की शुरुआत के दौरान बहन आग बबूला हो गई, उसने पूरे की-पेड मोबाइल को निगल लिया। चिकित्सकों ने जयारोग्य अस्पताल में सफलतापूर्वक सर्जरी की है।
मोबाइल निगलते ही युवती के पेट में तेज दर्द शुरू हो गया था। इसके बाद वह उल्टी करने लगी। उसके परिजन युवती की स्थिति को देखकर बिना समय गवाएं उसे ग्वालियर स्थित जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर प्रशांत पिपरिया और डॉक्टर नवीन कुशवाहा डॉक्टर प्रशांत श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम हरकत में आई।
इसके बाद युवती का एक्सरे सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंज, सहित अन्य जांच शुरू की गई। एंडोस्कोपी या लैप्रोस्कोपी से मोबाइल सुरक्षित नहीं निकाला जा सकता था। ऐसे में ऑपरेशन का फैसला किया। ऑपरेशन टीम ने युवती के पेट से मोबाइल को सुरक्षित निकालने के लिए लगभग 2 घंटे तक अथक प्रयास किया है।
डॉक्टर कुशवाहा ने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सर्जरी सक्सेसफुल रही। मोबाइल को पेट से सही सलामत निकाल लिया गया है। सर्जरी के दौरान युवती को 10 टांके लगे हैं। उसकी हालत स्थिर है। जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है। 2 दशक से अधिक के अनुभव रखने वाले डॉक्टर कुशवाहा ने इस अभूतपूर्व घटना पर आश्चर्य व्यक्त किया है।
डॉक्टर कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि हमने अपने शानदार करियर में इस तरह के मामले का सामना नहीं किया। उन्होंने छोटे बच्चों को मोबाइल फोन देते समय सावधानी बरतने के महत्व पर जोर दिया है।
साथ ही परिजनों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चे को ऐसे उपकरण देने से पहले उनकी परिपक्वता और जिम्मेदारी पर ध्यान दें। सर्जिकल टीम को रेजिडेंट सर्जन डॉक्टर अश्विनी पांडेय और डॉक्टर सुरेंद्र चौहान ने मदद की है। इनकी मदद से यह सर्जरी सक्सेसफुल रही।
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