भगवान के सामने तराजू की तौल से होता है इंसान और जानवर की मृत्युदर समेत फसलों की पैदावार का फैसला

चंबल के भिंड जिले के उदोतगढ़ गांव में स्थित रामजानकी मंदिर पर विशेष प्रक्रिया के तहत सभी को लग जाता है फसलों की पैदावार का पूर्व अनुमान

भिंड, 16 जुलाई। चंबल के बीहड़ों मे स्थित एक मंदिर ऐसा भी है जहां इंसान से लेकर जानवर तक के जीवन के मृत्युदर का पूर्व अनुमान मिल जाता है। मंदिर में इस बात का पता लग जाता है कि आने वाले साल में इंसान और जानवरों की मृत्युदर कैसी रहेगी। इतना ही नहीं आगामी साल में किस फसल की पैदावर कैसी रहेगी, इस बात पूर्व अनुमान भी इस मंदिर में लग जाता है। सुनने में आपको ये बात थोड़ी अजीब जरुर लगेगी, लेकिन यहां के लोगो का ये दावा है कि मंदिर में भगवान के सामने सालभर का लेखाजोखा पहले ही तय हो जाता है।

भिंड के बीहड़ी गांव में स्थित है रामजानकी मंदिर

भिंड के बीहड़ी गांव में स्थित है रामजानकी मंदिर

भिंड जिले के अटेर विधानसभा में बीहड़ों के बीच स्थित है ग्राम उदोतपुरा। इस गांव में भगवान रामजानकी का मंदिर मौजूद है। बताया जाता है कि यह मंदिर 312 साल पुराना है। इस मंदिर से लोगो की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। सालभर ये मंदिर अन्य मंदिरों की तरह ही सामान्य रहता है लेकिन गुरुपूर्णिमा के दिन यह मंदिर बेहद खास हो जाता है। इस मंदिर पर लोगो की भीड़ जमा हो जाती है और यहां एक विशेष प्रक्रिया अपनाकर इंसान से लेकर जानवर और यहां तक कि फसलों की पैदावार को लेकर पूर्वानुमान तैयार किए जाते है।

मंदिर में इंसान और जानवर की मिट्टी समेत रखे जाते है फसलों के जिंस

मंदिर में इंसान और जानवर की मिट्टी समेत रखे जाते है फसलों के जिंस

उदोतगढ़ गांव में स्थित रामजानकी मंदिर में पिछले कई साल से इस तरह की परंपरा चली आ रही है कि गुरुपूर्णिमा के दिन यहां इंसान और जानवर की मिट्टी के साथ साथ फसलों के जिंस तौल कर के मंदिर में रख दिए जाते है और उन्हें एक रात गुजर जाने के बाद दूसरे दिन फिर से तौल किया जाता है। तौल के हिसाब से ही सभी को लेकर पूर्वानुमान लगाया जाता है।

तौल के लिए बुलाया जाता है अनुभवी सुनार और उसका तराजू

तौल के लिए बुलाया जाता है अनुभवी सुनार और उसका तराजू

रामजानकी मंदिर में पूर्वानुमान की प्रकिया के लिए सबसे पहले अनुभवी सुनार को बुलाया जाता है। सुनार अपना तराजू साथ लेकर आता है। जिस तरह सुनार सोने को बुलकुल सटीक तौलता है, इसी तरह मंदिर में इंसान और जानवर की मिट्टी समेत फसलों के जिंस को भी बुलकुल सटीक तौलने का काम सुनार द्वारा किया जाता है। पूर्वानुमान की इस प्रक्रिया के का परिणाम जानने के लिए आस पास के गांव के लोगों समेत बड़ी संख्या में व्यापारी भी उदोतपुरा के रामजानकी मंदिर में पहुंचते है। इतना ही नहीं मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी व्यापारी पूर्वानुमान को देखने उदोतपुरा गांव पहुंचते है।

यूं होती है पूरी प्रक्रिया

यूं होती है पूरी प्रक्रिया

गुरुपूर्णिमा की शाम को रामजानकी मंदिर मे सभी लोग जमा हो जाते है। इसके बाद मंदिर में मौजूद सुनार अपने तराजू से सभी अनाज और मसालों की दस-दस ग्राम की पुड़िया को तौलने का काम शुरु कर देता है। बहुत ही ध्यान से तौलने का काम किया जाता है। फसलों के साथ ही इंसान और जानवर की मृत्युदर पता लगाने के लिए इंसान और जानवर के नाम की मिट्टी को पुड़िया में तौल लिया जाता है। इन सभी तौल की गई पुड़िया को एक संदूक में बंद कर भगवान रामजानकी के चरणों में रख देते हैं और प्रतिमा स्थल के पट बंद कर देते है। दूसरी सुबह सभी लोग एक बार फिर से मंदिर में एकत्रित होते है और पूजा करने के बाद भगवान के चरणों में रखे संदूक को निकाल लेते है। एक बार फिर से सभी पुड़िया को सुनार द्वारा तौलने का काम किया जाता है। तौल में जिस पुडिया का वजन कम हो जाता है उसके बारे में ऐसा मान लिया जाता है कि आने वाले साल में उस फसल की पैदावार कम होगी। जिस पुड़िया का वजन बढ़ जाता है उसके लिए माना जाता है कि उस फसल की पैदावार अच्छी होगी। फसलों की तरह इंसान और जानवरों की मिट्टी की भी तौल की जाती है। अगर इन पुड़िया का वजन कम हो जाता है तो माना जाता है कि आगामी वर्ष में लोगों की मौत ज्यादा होगी। अगर वजन बढ़ जाता है तो माना जाता है कि लोग स्वस्थ्य रहेंगे और जनसंख्या वृद्धी होगी।

कई साल से लोग अपना रहे है यह तरीका

कई साल से लोग अपना रहे है यह तरीका

रामजानकी मंदिर में तौल करके फसलों के बारे में यहां के लोग पूर्मानुमान लगाकर ही अपनी फसल की पैदावार करते है। स्थानीय किसानों का दावा है कि इस प्रक्रिया पर वे पूरा विश्वास करते है इस वजह से उनकी फसलों की पैदावार हमेशा अच्छी होती है। व्यापारी भी इसी पूर्वानुमान के सहारे अपना व्यापार करते है। इस पूर्वानुमान का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हैं लेकिन आस्था के सामने यहां विज्ञान का टिक पाना संभव नहीं है। इस पूर्वानुमान के आधार पर हर साल यहां के किसान मुनाफा कमा रहे है। इसलिए यहां के किसानों के लिए इस प्रक्रिया पर विश्वास नहीं करने का कोई कारण भी नहीं है।

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