रैगिंग से सख्ती से निबटेंगे हरियाणा के कॉलेज

गुड़गांव सेक्टर नौ स्थित पीजी कालेज की प्राचार्य सुषमा चैधरी ने बताया कि कालेज में रैगिंग करने वाले असामाजिक तत्वों के विषय में अन्य छात्रों का जागरुक होना आवश्यक है। ताकि छात्र समय रहते शिकायत कर सकें और उन पर कड़ी कार्यवाही की जा सके। इतना ही नहीं कैंपस में रैगिंग के नियम लिखे बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
द्रोणाचार्य गर्वनमेंट कालेज के प्राचार्य आरके यादव का कहना है कि रैंगिग केवल शारीरिक चोट ही नहीं पहुंचाती है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रुप से भी घाव दे जाती है। इसलिए रैगिंग करने वाले छात्रों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। ऐसे छात्रों को तुरंत निलंबित या निष्कासित करने के साथ ही उनकी छात्रवृत्ति को रद्द किया जाएगा। रैगिंग में लिप्त छात्रों पर यथासंभव एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
सलाहकार मनोचिकित्सक डा ज्योति कपूर का मानना है कि विशेष जागरुकता अभियान सीनियर और नए छात्रों दोनों के लिए तैयार किया गया है। रैगिंग एक परंपरा बन चुकी है। जो नए छात्र रैगिंग से गुजरते हैं अगले सत्र में वह नए छात्रों की रैगिंग उसी तरह से करते हैं। यह बिल्कुल दहेज प्रथा की तरह है। हमें पहले ही दिन पुराने और नए छात्रों के बीच बातचीत को बढ़ावा देना होगा।
कालेजों में रैगिंग के खिलाफ जागरुकता के लिए ठोस कदम उठाए हैं। रैगिंग से निबटने के लिए कालेजों में एंटी रैगिंग बोर्ड, प्राॅक्टोरियल बोर्ड, छात्र व पुलिस मिलकर नियमित कैंपस में छात्रों पर नजर रखेंगे।
क्या-क्या है जरूरी
-कालेजों में रैगिंग से निबटने के लिए रैगिंग जागरुकता अभियान आवश्यक है। इस तरह से कुछ हद तक नए छात्रों को रैगिंग का शिकार होने से बचाया जा सकेगा।
-कालेज खुलने के साथ ही नए छात्रों व पुराने छात्रों के बीच बातचीत का सामंजस्य बिठाने से रैगिंग की संभावनाएं कम होंगी।
-कालेजों में प्रोक्टोरियल बोर्ड की नियमित जांच व पैनी नजर छात्रों को रैगिंग से बचाने में सहायक होगी।
-रैगिंग से डरे नहीं, मुकाबला करें, नए छात्रों में अभियान के तहत इन स्लोगनों से छात्र रैगिंग से अपना मनोबल तोड़ने के बजाए मुकाबले के काबिल बनेंगे।












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