क्यों अब गुजरात में बीजेपी को पड़ी मुस्लिम वोट की जरूरत ? 'अल्पसंख्यक मित्र' के बारे में जानिए
अहमदाबाद, 11 सितंबर: गुजरात में अभी बीजेपी सरकार बिलकिस बानो के गुनहगारों की रिहाई के चलते निशाने पर है। लेकिन, इसी दौरान उसने मुस्लिम वोट बैंक के बीच अपने लिए उम्मीद तलाशने की कोशिशें भी शुरू कर दी हैं। पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने इसके लिए विशेष 'अल्पसंख्यक मित्र' अभियान शुरू किया है, जिसके लिए पार्टी मुसलमानों के प्रभाव वाले विधानसभा सीटों पर फोकस कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने इस अभियान के बारे में पूरी जानकारी दी है और बिलकिस बानो पर गुजरात सरकार के स्टैंड को लेकर पार्टी का पक्ष भी रखा है।

मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर 100 'अल्पसंख्यक मित्र' बनाएगी
गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसबार राज्य में बीजेपी मुसलमानों के बीच भी संपर्क अभियान चलाने पर खास जोर दे रही है। विपक्षी पार्टियां भाजपा सरकार पर अक्सर मुसलमान-विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाती रही हैं। हाल में बिलकिस बानो के मामले में भी विपक्ष और बीजेपी-विरोधी विचारधारा वालों ने खूब तूफान खड़ा किया है। ऐसे में भाजपा का मुसलमानों के बीच विशेष संपर्क अभियान चलाने की पहल खास मायने रखती है। पार्टी ने इस संपर्क अभियान के तहत प्रभावी मुस्लिम आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम 100 'अल्पसंख्यक मित्र' बनाने का लक्ष्य तय किया है। बीजेपी नेता और पार्टी के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को रविवार को इस बारे में जानकारी दी है।

क्या होगी 'अल्पसंख्यक मित्र' की जिम्मेदारी ?
बीजेपी के माइनोरिटी सेल के चीफ ने कहा है, अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोग, जिसमें खासकर मुसलमान हैं, पार्टी उन्हें उनके प्रभावी आबादी वाले क्षेत्रों की बूथ कमिटियों में भी शामिल करेगी। सिद्दीकी बोले, 'बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले कम से कम 100 मुसलमानों को पार्टी से हमदर्दी रखने वालों के रूप में जोड़ने के लिए एक अभियान शुरू किया है। वे आध्यात्मिक नेता, प्रोफेशनल, उद्यमी हो सकते हैं और सरकार में काम करने वाले लोग भी हो सकते हैं।' उनके मुताबिक 'अल्पसंख्यक मित्र' की अपने इलाके में कम से कम 50 अल्पसंख्यक वोट भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

गुजरात के 109 सीटों पर मुसलमानों की अच्छी आबादी
गुजरात के 109 विधानसभा क्षेत्रों में मुसलमानों का वोट 25,000 से लेकर 1 लाख तक है, वहां माइनोरिटी सेल के मेंबरों को बीजेपी की बूथ कमिटियों में भी शामिल किया जाएगा। दिलचस्प बात ये है कि गुजरात में भाजपा ऐसे वक्त में मुसलमानों का पार्टी के प्रति नजरिया बदलने की कोशिश कर रही है, जब बिलकिस बानो के बलात्कारियों और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के गुनहगारों की रिहाई के मुद्दे पर पार्टी को चौतरफा घेरने की कोशिश हो रही है। यह मामला 2002 के गुजरात दंगों से जुड़ा है।

दया तो भारतीय संस्कृति का हिस्सा है- जमाल सिद्दीकी
जब सिद्दीकी से बिलकिस बानो के मामले पर सवाल किया गया तो उन्होंने बीजेपी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि इसने एक कमिटी बनाई थी, 'हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए (कमिटी बनाई थी) और उस कमिटी ने दोषियों को रिहा करने का फैसला किया।' उन्होंने ये भी कहा कि 'बीजेपी सरकार ने ही उन्हें सजा दी थी और उन्हें कुछ सजा पूरी करने के बाद रिहा किया गया है......आखिरकार, दया तो भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।' गुजरात दंगों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा है, '2002 में दंगे हुए थे, यह दुर्भाग्यपूर्ण था। यह अब बीत चुका है, लोग आगे बढ़ चुके हैं। लोगों ने देखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाति और धर्म के आधार पर अंतर नहीं करते हैं। लोगों की आस्था चाहे कुछ भी हो, उनकी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फायदा मिला है।'

गुजरात में करीब 10% है मुस्लिम आबादी
2011 की जनगणना के मुताबिक गुजरात में मुसलमानों की आबादी 9.65% थी, जो कि सबसे बड़ी अल्पसंख्यक समुदाय है। लेकिन, 2017 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 3 मुस्लिम एमएलए ही विधानसभा में पहुंचे थे और वे सभी कांग्रेस के हैं। कांग्रेस ने तब 5 मुसलमानों को टिकट दिया था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की ओर से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं मिल सका था। गुजरात के लिए भाजपा की यह बदली रणनीति ऐसे समय में देखी जा रही है, जब कांग्रेस से मुस्लिम वोट बैंक छीनने के लिए आम आदमी पार्टी भी खूब सियासी झाड़ू चलाने की कोशिशों में जुटी हुई है।(कुछ तस्वीरें प्रतीकात्मक)












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