सुनीता यादव बोलीं- मंत्री के बेटे से विवाद खत्म करने के लिए मुझे 50 लाख का ऑफर मिला
सूरत। गुजरात में सूरत के वराछा क्षेत्र में स्वास्थ्य राज्यमंत्री कानाणी के बेटे प्रकाश कानाणी के साथ हुए विवाद के बाद से महिला कॉन्स्टेबल सुनीता यादव सुर्खियों में हैं। वह फेसबुक अकाउंट पर विवाद से जुड़ा कुछ न कुछ आए रोज पोस्ट कर रही हैं। इस बार उन्होंने कहा, 'विवाद निपटाने के लिए मुझे 50 लाख का ऑफर मिला।'
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एलआर सुनीता यादव का नया शगूफा
सुनीता बोलीं- ''मेरा टाइम खराब चल रहा है। जो हुआ उसमें मंत्री की कोई गलती नहीं है। उसके बेटे ने जो किया, इस बारे में अभी केवल 10 पर्सेंट ही लोग जानते हैं। अभी तो 90 पर्सेंट लोगों के सामने आना बाकी है। मैं अपना इस्तीफा मंजूरी करने की प्रोसेस पूरी होने के बाद इस बारे में आपको बताऊंगी।''

मैं लेडी सिंघम नहीं हूं, लेकिन अच्छा लगा लोग यह बोले
यह पूछे जाने पर 50 लाख का ऑफर किसने दिया, तो सुनीता ने कोई जवाब नहीं दिया। पिता की कार पर पुलिस का स्टीकर लगाने के बारे में भी वह कुछ नहीं बोल पाईं। हालांकि, लेडी सिंघम कहे जाने पर वह बोलीं कि, 'मैं लेडी सिंघम नहीं हूं। मैं एक आम एलआर अधिकारी (लोक रक्षक दल) हूं। उस रोज मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाई। लोगों ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि ज्यादातर पुलिसकर्मी ऐसा नहीं कर पाते हैं। मगर अच्छा लगता है, जब लोग ऐसा कहते हैं।'

मीडिया ने झूठ फैलाया, सच्चाई मैं बताकर रहूंगी
मालूम हो कि, प्रकाश कानाणी की धौंस का तीखा जवाब देने के बाद सुनीता यादव का उसकी तैनाती वाले इलाके से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया था। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू करा दी गई। तो वह अब अपनी विवशता के बारे में फेसबुक अकाउंट से वीडियो लाइव करती रहती हैं। बीते दिनों उन्हेांने अपने उूपर पड़ रहे राजनीति दवाब के बारे में बात की। उन्होंने मीडिया पर झूठ फैलाने के आरोप लगाए और कहा कि, सच्चाई मैं बताकर रहूंगी।'

मेरे साथ दिल्ली जैसा निर्भया-कांड हो जाता
सुनीता ने कहा, "शुक्रवार की रात करीब 10 बजे सूरत के वराछा में कोरोना वायरस की चलते कर्फ्यू लगा था। मैं कर्फ्यू नियमों का पालन कराने के लिए वहां पर ड्यूटी कर रही थी। तभी बिना मास्क के घूम रहे कुछ लड़कों को रोक लिया और कर्फ्यू के प्रोटोकॉल के उल्लंघन में उनसे पूछताछ की। तो उन लोगों ने अपने दोस्त (मंत्री के बेटे) को फोन किया। जिसके बाद स्वास्थ्य राज्यमंत्री किशोर कानाणी का बेटा प्रकाश कानाणी कार लेकर दोस्तों को छुड़ाने आ गया। वो जिस कार से आया था, उसमें विधायक का बोर्ड लगा था। वो सभी मुझसे बदतमीजी करने लगे। गलत इशारे भी किए। तब अगर मेरे साथ अन्य जवान नहीं होते तो मेरे साथ दिल्ली की 'निर्भया' जैसा कांड हो सकता था।"

जल्द ही मैं लिखित में इस्तीफा दूंगी
"उस दिन के बाद मेरे सीनियर्स द्वारा मेरा ट्रांसफर करके मुझे इस्तीफे के लिए विवश किया गया। अभी मैंने मौखिक रूप से कहा है, लेकिन जल्द ही मैं लिखित में इस्तीफा दूंगी। घटना घटित होने के बाद से मैं सो भी नहीं पा रही हूं। स्ट्रेस काफी ज्यादा है। आंखों में जलन होती है। मुझे बोलने में भी प्रॉब्लम हो रही है। मेरे पर बहुत पॉलिटिकल प्रेशर डाला गया।''












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