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Morbi Bridge Collapse: हादसे को SC ने बताया 'बड़ी त्रासदी', कहा-'HC तय करे जवाबदेही'

गुजरात के मोरबी में ओवरब्रिज के ढहने से 145 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि कई लोग घायल हो गए थे। इस हादसे को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी त्रासदी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यह एक "बहुत बड़ी त्रासदी" है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय से इस मामले को समय-समय पर स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया है, ताकि मामले में सही जांच व जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो और पीड़ितों के सभी नुकसान तरह के नुकसान का समाधान किया जा सके।

supreme court

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा है। क्योंकि हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद मामला पहले ही शुरू हो चुका है। आपको बता दें कि पुल की सही से मरम्मत नहीं हुई थी। वहीं, मरम्मत के बाद पुल को बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ही खोल दिया गया था। जिसकी वजह से पुल खुलने के 4 दिन बाद यानि कि 30 अक्टूबर को टूट गया था।

मामले में पिछले सप्ताह गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी नागरिक निकाय से पूछा था कि क्या ब्रिटिश-जमाने के पुल की सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्राधिकरण ने फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया था। साथ ही गुजरात हाईकोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या उसने पुल को पब्लिक के लिए खोलने के लिए मरम्मत करने वाली कंपनी को कहा था? इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश आशुतोष त्रिपाठी की बेंच ने प्राधिकरण से यह भी कहा था कि अगर उसके पास घड़ी बनाने वाली कंपनी को पुल मरम्मत का टेंडर देने का कोई दस्तावेज है, तो भी रिकॉर्ड के लिए पेश करे।

हालांकि, अदालत में चल रहे मामले के बीच नागरिक निकाय ने एक हलफनामे में कहा था कि मोरबी नगरपालिका ने 29 दिसंबर, 2021 को अजंता ने मोरबी नगरपालिका के तत्कालीन मुख्य अधिकारी को सूचित किया था। नगर पालिका ने कहा था कि पुल की स्थिति गंभीर है। साथ ही नगरपालिका की तरफ से पुल के रखरखाव और प्रबंधन के लिए नीति बनाने के लिए भी कहा था। वहीं, 29 दिसंबर 2021 के संचार के बाद 7 मार्च, 2022 तक पुल के उपयोग की अनुमति दी गई थी।

आपको बता दें कि मोरबी ओवरब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी ओरेवा ग्रुप को दी गई थी। कंपनी की तरफ से पुल की मरम्मत के लिए 2 करोड़ रुपए का टेंडर लिया गया था। लेकिन मरम्मत में सिर्फ 12 लाख रुपए ही खर्च किए गए थे। वहीं, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ही पुल को लोगों के लिए खोल दिया गया था और पुल खुलने के कुछ दिन बाद ही टूट गया।

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