PURNA yojna:गुजरात में किशोरियों का कुपोषण हो रहा दूर, सशक्त हो रही है स्त्री शक्ति

गांधीनगर: गुजरात सरकार महिलाओं और बच्चों के कल्याण और स्वास्थ्य से संबंधित कई योजनाएं चला रही है। इसी के तहत खासकर किशोरियों को कुपोषण से बचाने और उनके सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए राज्य महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से एक विशेष योजना चलायी जा रही है। इस योजना का नाम है- 'पूर्णा स्कीम' यानी किशोरियों में कुपोषण की रोकथाम और एनीमिया जैसी स्वास्थ्य से संबंधी शिकायतें दूर करने की पहल; और इसके साथ ही उनके कौशल को विकसित करने पर जोर। यह योजना लड़कियों और होने वाली माताओं की शारीरिक फिटनेस को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो कि आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

Government of Gujarat is running PURNA Yojana to protect adolescent girls from malnutrition and for their social and economic development, which has benefited lakhs of adolescent girls

'पूर्णा योजना' का पूर्ण मकसद
'पूर्णा योजना' का पूर्ण मकसद 15 से 18 वर्ष की उम्र की सभी किशोरियों में कुपोषण और एनीमिया की समस्या दूर करना तो है ही, स्वास्थ्य शिक्षा देने के अलावा बाल विवाह प्रथा को मिटाना, जीवन कौशल को बेहतर करना, सामाजिक और व्यावसायिक कौशल बढ़ाने के साथ-साथ कानूनी अधिकारों और जन सेवाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाना भी है। अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच कुल 12, 37,858 किशोरियों का 'पूर्णा योजना' के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ था, जिनमें से 11, 94,565 को पोषण से संबंधी सेवाएं उपलब्ध करवाई गई थी।

'पूर्णा योजना' के सफल संचालन में आंगनबाड़ी केंद्रों की बड़ी भूमिका
वित्त वर्ष 2021-22 में इस योजना के तहत 11,76,040 तक लाभ पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, इनके लिए प्रत्येक लाख की संख्या के लिए 22,948 रुपये की व्यवस्था की गई थी। इस योजना के सफल संचालन में गुजरात की 53 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभी तक 'पूर्णा योजना' के माध्यम से 60 लाख किशोरियों को जोड़ा जा चुका है और उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ आर्थिक उन्नति की दिशा में भी पहल की गई है। किशोरियां अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें, यह बात इस योजना के लिए बहुत ही अहम है।

'पूर्णा योजना' के बारे में गांधीनगर की पारुल ठाकोर ने कहा

किशोरियों की शारीरिक कमजोरी के कारण मां बनने पर उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। सरकार की पूर्णा योजना के माध्यम से उन्हें किफायती किट उपलब्ध करवाई जाती है, जिसके आहार से उनमें शारीरिक कमजोरी दूर हो जाती है

भावी माताओं की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बारे में गीताबेन ने कहा

गर्भावस्था से पहले शारीरिक कमजोरी के कारण उन्होंने आंगनबाड़ी से मिलने वाले भोजन का सेवन किया, जिससे आवश्यक पोषक तत्वों और विटामिनों से युक्त एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जो पूरी तरह से रोग मुक्त है

बजट में 220 करोड़ रुपये का प्रावधान
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार प्रदेश में 'महिला विकास से राष्ट्र विकास' को ध्यान में रखकर काम कर रही है। इन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सरकार हर महीने इन बालिकाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाती है। इस योजना के माध्यम से 42 लाख किशोरी लाभार्थियों को 16,000 मीट्रिक टन पौष्टिक राशन किट प्रदान की गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए बजट में 220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस स्कीम में फोर्टिफाइड आटा, आयोडीन युक्त नमक, अन्य विटामिन युक्त खाद्य पदार्थ वाले किट वितरित किए जाने की व्यवस्था है।

गुजरात सरकार लगातार किशोरियों और महिलाओं के विकास के लिए प्रयासरत है। महिलाओं को राशन किट उपलब्ध करवाने के साथ ही कुशल महिला कामगारों द्वारा उनकी काउंसलिंग भी की जाती है। जिससे युवतियों में सही समझ विकसित हो सके और वे अपने स्वस्थ भविष्य का निर्माण कर सकें।(तस्वीर-सांकेतिक)

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