गुजरात आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गांधी आश्रम में चलाया चरखा, देखिए VIDEO
अहमदाबाद। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुजरात आईं। यहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।द्य उसके बाद अहमदाबाद के गांधी आश्रम में चरखा भी चलाया। सरकार की ओर से बताया गया कि, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से दो दिनों के लिए गुजरात दौरे पर हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुजरात की राजधानी गांधीनगर भी जाएंगी। जहां वह एक समारोह में 1,330 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत भी करेंगी।
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पहली बार गुजरात आई हैं राष्ट्रपति द्रौपदी
राष्ट्रपति के रूप में मुर्मू का यह पहला गुजरात दौरा है। वह विगत जुलाई महीने में ही राष्ट्रपति बनी हैं। उन्होंने देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में संसद भवन के सेंट्रल हॉल में शपथ ली थी। वह देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं और स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली और पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद 25 जुलाई को द्रौपदी मुर्मू ने देश को पहली बार संबोधित किया। उस दरम्यान द्रौपदी मुर्मू ने कहा था, ''जोहार,नमस्कार, मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूं। आपकी आत्मीयता, विश्वास और आपका सहयोग, मेरे लिए इस नए दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे।''

जुलाई में बनीं देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शाकाहार लेती हैं। वह मांस नहीं खातीं। जब उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, उसके बाद भाषण में उन्होंने कहा था कि, 'मेरे निर्वाचन में देश के गरीब का आशीर्वाद शामिल है, देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और सामर्थ्य की झलक है। उन्होंने कहा था, ऐसे ऐतिहासिक समय में जब भारत अगले 25 वर्षों के विजन को हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से जुटा हुआ है, मुझे ये जिम्मेदारी मिलना मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है।

स्वतंत्र भारत में जन्मी पहली राष्ट्रपति हैं मुर्मू
मुर्मू ने कहा, ''मैं देश की पहली राष्ट्रपति हूं जिसका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। स्वतंत्र भारत के नागरिकों के साथ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हमें अपने प्रयासों में तेजी लानी होगी।'' राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कहना है, ''मेरे लिए बहुत संतोष की बात है कि जो सदियों से वंचित रहे, जो विकास के लाभ से दूर रहे, वे गरीब, दलित, पिछड़े तथा आदिवासी मुझ में अपना प्रतिबिंब देख रहे हैं।''












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