गुजरात: पीएम मोदी ने खेल महाकुंभ 2022 का किया शुभारंभ, 2 साल बाद हो रहा आयोजन
अहमदाबाद, 12 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम में खेल महाकुंभ 2022 का शुभारंभ किया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, 'मैं गुजरात सरकार को विशेष रूप से सीएम भूपेंद्रभाई पटेल को भी इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देता हूं। कोरोना के कारण 2 साल तक खेल महाकुंभ पर ब्रेक लगा रहा, लेकिन सीएम ने जिस भव्यता के साथ इस आयोजन को शुरू किया, उसने युवाओं में एक नया जोश भर दिया है।'

खेल महाकुंभ का उद्घाटन करने के बाद अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि भीड़ हमें बता रही है कि आप सब आसमान छूने को तैयार हैं। कोविड की वजह से हम खेल महाकुंभ का आयोजन नहीं कर पाए। 16 खेलों और 13 लाख प्रतिभागियों के साथ 2010 में शुरू हुए खेल महाकुंभ में आज 36 सामान्य खेल और 26 पैरा खेल शामिल हैं।
पीएम मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे सामने युवा जोश का ये सागर, ये उमंग साफ बता रही हैं कि गुजरात का नौजवान आसमान छूने के लिए तैयार हैं। ये ना केवल खेलों का महाकुंभ है बल्कि ये गुजरात की युवा शक्ति का भी महाकुंभ है। मैं आप सभी युवाओं को 11वें खेल महाकुंभ के लिए शुभकामनाएं देता हूं। पीएम ने आगे कहा, 'मुझे याद है 12 साल पहले 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते मैंने अपने कार्यकाल में खेल महाकुंभ की शुरूआत की थी। आज मैं कह सकता हूं कि जिस सपने का बीज मैंने बोया था, आज वो वट वृक्ष बनता दिखाई दे रहा है। उस बीज को मैं आज वट वृक्ष का आकार लेता हुआ देख रहा हूं।'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि साल 2010 में पहले खेल महाकुंभ में ही गुजरात ने 16 खेलों में 13 लाख खिलाड़ियों के साथ इसका आरंभ किया था। मुझे भूपेंद्र भाई ने बताया कि 2019 में हुए खेल महाकुंभ में ये भागीदारी 13 लाख से 40 लाख युवाओं तक पहुंच गई थी। ये जो लगातार अविराम प्रयास किए गए, खिलाड़ियों ने जो साधना की और जब खिलाड़ी प्रगति करता है तो उसके पीछे एक लंबी तपस्या होती है। जो संकल्प गुजरात के लोगों ने मिल कर लिया था वो आज दुनिया में अपना परचम लहरा रहा है।
मोदी ने आगे कहा कि इतना ही नहीं जैसे राजनीति में भाई भतीजावाद घुस गया है वैसे ही खेल जगत में भी खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता की कमी एक बहुत बड़ा फैक्टर थी। खिलाड़ियों की सारी प्रतिभा परेशानियों से जूझने में ही निकल जाती थी। उस भवर से निकल कर भारत के युवा आज आसमान छू रहे हैं। एक समय था जब खेल जगत में भारत की पहचान सिर्फ 1-2 खेलों के भरोसे टिकी थी। जिसके कारण जो खेल देश की पहचान और गौरव से जुड़े थे उन्हें भी भुला दिया गया। इस वजह से खेलों से जुड़े संसाधन बढ़ाने, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर जितना ध्यान देना चाहिए था वो रूक गया था। साल 2018 में हमने मणिपुर में देश का पहला राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय स्थापित किया। खेलों में उच्च शिक्षा के लिए यूपी में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी शुरू होने जा रही है।












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