मोरबी हादसा: पुल की मरम्मत करने वाली कंपनी के मालिक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
मोरबी पुल हादसे की जांच कर रही टीम ने जयसुख पटेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उनकी कंपनी के पास पुल की रिपेयरिंग का जिम्मा था।

मोरबी पुल हादसे में अब पुलिस ने ओरेवा ग्रुप के प्रमोटर और अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पटेल घटना के बाद से ही फरार हैं। मोरबी में जो पुल टूटा था, उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी इसी कंपनी के पास थी। इस हादसे में करीब 135 लोगों की मौत हुई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इस मामले की चार्जशीट में भी पटेल को आरोपी बनाया गया है।
दरअसल अजंता ब्रांड के तहत दीवार घड़ियां बनाने के लिए जानी जाने वाली कंपनी ओरेवा ग्रुप को मच्छू नदी पर बने सस्पेंशन ब्रिज के संचालन और रखरखाव का जिम्मा मिला था। इसी कंपनी ने करीब 100 साल पुराने ब्रिज की मरम्मत भी की थी, लेकिन दोबारा खुलने के चार दिन बाद ही ये 30 अक्टूबर को टूट गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। चुनाव से ऐन वक्त पहले हुए इस हादसे को विपक्षी दलों ने मुद्दा बनाया। साथ ही आरोप लगाया था कि बीजेपी सरकार पटेल को बचाने की कोशिश कर रही, जिस वजह से उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही। हालांकि उससे उनको ज्यादा फायदा नहीं हुआ।
जांच में ये बात आई सामने
वहीं दूसरी ओर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने भी इस घटना की जांच की थी, जिसमें पता चला कि पुल के नवीनीकरण में जंग लगी केबल, टूटे एंकर पिन और ढीले बोल्ट का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा पुल की क्षमता की जांच के लिए कंपनी ने किसी भी एजेंसी को नियुक्त नहीं किया। वहीं घटना वाले दिन वहां पर भीड़ ज्यादा हो गई थी, लेकिन कंपनी के कर्मचारी टिकटों की बिक्री करते गए और उस पर आवाजाही के लिए कोई प्रतिबंध भी नहीं लगाया इस मामले में अब तक कुल 9 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिसमें उपठेकेदार, टिकट बेचने वाला क्लर्क, सुरक्षा गार्ड आदि शामिल हैं।
एक फरवरी को होगी जमानत पर सुनवाई
वहीं दूसरी ओर गिरफ्तारी के डर से पटेल फरार हैं। उन्होंने सत्र अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका डाली थी, जिस पर 1 फरवरी को सुनवाई होगी।












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