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हार्दिक पटेल का राजनीतिक सफर: कैसे पाटीदार नेता बनकर सत्ताधारी दल की नींद उड़ाई, कांग्रेस ने क्यों बनाया गुजरात का कार्यकारी अध्यक्ष

अहमदाबाद। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के जरिए सत्ताधारी दल भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले हार्दिक पटेल को कांग्रेस ने अपना कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया है। वर्ष 2015 में हार्दिक पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के संयोजक बने थे। उस साल अगस्त के महीने में उन्होंने अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में पाटीदार आरक्षण समर्थक रैली आयोजित की थी, जिसे लाखों लोगों ने समर्थन दिया। उस मर्तबा राज्यव्यापी तोड़फोड़ एवं हिंसा की घटनाएं भी हुईं। सरकार के आदेश पर उनके खिलाफ राजद्रोह का केस कर दिया गया। तब से लेकर आज तक उन्हें बहुत बार जेल हुई, लेकिन वह कभी सत्ताधारी दल के खिलाफ बोलने से पीछे नहीं हटे।

बार-बार गिरफ्तार हुए, कई दफा सत्ताधारी दल की नींद उड़ाई

बार-बार गिरफ्तार हुए, कई दफा सत्ताधारी दल की नींद उड़ाई

पटेल समुदाय को गुजरात में बीजेपी का बड़ा वोट बैंक माना जाता रहा है। ऐसे में जब हार्दिक पटेल को सत्ता के खिलाफ माहौल बनाते देखा, तो सरकार हाथ धोकर हार्दिक के पीछे लग गई। हार्दिक शुरूआत में तो कांग्रेस से कोई रिश्ता रखने से इनकार करते रहे, मगर फिर जब चुनाव आए तो उन्होंने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पाटीदार आंदोलन के बदौलत बने माहौल का फायदा उठाते हुए बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, बीजेपी सत्ता से बाहर नहीं हो पाई, बल्कि फिर से चुन ली गई। वहीं, विधानसभा चुनावों के उपरांत 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो हार्दिक ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। राहुल गांधी ने उन्हें अपनी पार्टी का स्टार प्रचारक बनाया। इस प्रकार हार्दिक बीजेपी के खिलाफ और ज्यादा मुखर हो गए।

अहमदाबाद से 80 किमी दूर हुआ था हार्दिक पटेल का जन्म

अहमदाबाद से 80 किमी दूर हुआ था हार्दिक पटेल का जन्म

हार्दिक पटेल अहमदाबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर वीरमगाम तहसील के चंद्रनगर गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1993 को हुआ था। उन्होंने कॉमर्स (वाणिज्य विषय) से ग्रेजुएशन किया था। वह पढ़ाई में कमजोर साबित हुए। मगर, अपने समाज के गुटों में अच्छी-खासी पैठ बनाने लगे। सबसे पहले वह 31 अक्टूबर 2012 को पटेल समुदाय के युवा वर्ग के एक ग्रुप का हिस्सा बने थे। एक महीने के भीतर ही वह विरंगम यूनिट के प्रेसिडेंट बन गए। उसके बाद तो उनके समर्थक बढ़ते ही चले गए।

पहली बार महेसाणा में छोटी-सी रैली से दिखाई ताकत

पहली बार महेसाणा में छोटी-सी रैली से दिखाई ताकत

वर्ष 2015 में, 6 जुलाई को हार्दिक पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया की सुर्खियों में आए। उन्होंने गुजरात के महेसाणा में एक छोटी-सी रैली करके एक बड़ा आंदोलन बना दिया। कहा जाता है कि अपने पड़ोसी लड़के को कम नंबर के बावजूद सरकारी नौकरी मिलने के बाद हार्दिक ने आरक्षण पाने के लिए आंदोलन की शुरुआत की। धीरे धीरे उन्हें पटेल समुदाय के रिटायर्ड अफसरों का साथ मिलने लगा।

सूरत से की थी अपने आंदोलन की शुरुआत

सूरत से की थी अपने आंदोलन की शुरुआत

अगस्त 2015 में उन्होंने सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में सूरत में आयोजित रैली में 5 लाख से अधिक पटेलों को एक ही जगह पर जुटा लिया। उसके बाद उसी साल 25 अगस्त उन्होंने अहमदाबाद में महारैली का आयोजन किया। हार्दिक के भाषणों को सुनने वालों की भीड़ बढ़ती चली गई। हार्दिक ने अगस्त 2015 तक गुजरात में ताबड़तोड़ 80 से ज्यादा रैलियां कीं। जिससे गुजरात सरकार की नींद उड़ने लगी। गुजरात सरकार ने उन्हें महारैली के लिए अनुमति नहीं दी। बाद में हार्दिक को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में वह जमानत पर छूट गए।

खुद नहीं लड़ा विधानसभा चुनाव

खुद नहीं लड़ा विधानसभा चुनाव

हार्दिक पटेल ने खुद विधानसभा के चुनाव नहीं लड़े। बजाए इसके वह अपने दोस्तों को इसके लिए आगे बढ़ाते रहे। उन्हेांने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया तो राहुल गांधी, सोनिया गांधी एवं गुजरात कांग्रेस की आलकमान उनकी तारीफ करने लगी। उसी बीच वर्ष 2017 के नवम्बर महीने में हार्दिक की अश्लील सीडी लीक हो गई। जिसमें वह एक कमरे में लड़की के साथ दिखे। मगर, इस प्रकरण में हार्दिक ने खुद को पाक साफ बताते हुए कहा कि, यह सब बीजेपी करवा रही है। पटेल ने दावा किया कि ये मेरे खिलाफ बीजेपी का गंदा खेल है।' मगर, इस सीडी की वजह से हार्दिक की छवि काफी धूमिल हुई। उनके समाज के कई लोग उनके ही खिलाफ हो गए।

2019 के लोकसभा चुनाव में उतरे

2019 के लोकसभा चुनाव में उतरे

2019 में जनवरी, फरवरी, मार्च एवं अप्रैल के महीने में हार्दिक पटेल ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ जमकर भाषण दिए। उन्होंने दूसरे राज्यों में भी रैलियां कीं। वह अधिकारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए। इस सबके बावजूद उनके प्रयासों पर मोदी लहर भारी पड़ गई। जो लाखों पाटीदार कभी भाजपा की राज्य सरकार से नाराज चल रहे थे, उन्होंने ही भाजपा को भी वोट दिया। अंतत: हुआ ये कि लोकसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर से गुजरात की सभी सीटें कब्जाने में सफल रहीं।

हार्दिक को जेल हुई तो पत्नी भी मोर्चा खोलने लगीं

हार्दिक को जेल हुई तो पत्नी भी मोर्चा खोलने लगीं

इन लोकसभा चुनाव में हार्दिक पटेल खुद भी चुनाव लड़ना चाहते थे। मगर, उनके उूपर बहुत सारे केस चल रहे थे। आखिर तक भी वो अपना पर्चा नहीं भर पाए। चुनाव परिणाम आ गए। हार्दिक को फिर जेल जाना पड़ा। ऐसे समय में उनकी पत्नी हमेशा हार्दिक का हौसला बढ़ाती रही। वर्ष 2020 में भी हार्दिक पटेल को पुलिस ने पकड़ा। तब उनकी पत्नी किंजल पटेल ट्विटर के जरिए राज्य सरकार पर आरोप लगाने लगीं। वह शायरना अंदाज में ट्वीट करतीं। इस तरह हार्दिक पटेल का कांग्रेस में भी रुतबा बढ़ने लगा। पति-पत्नी के ऐसे तेवरों की बदौलत ही, लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के पास इनके जैसा फायरब्रांड प्रचारक नहीं था। बहरहाल, हार्दिक गुजरात में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिए गए हैं।

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