गुजरात में SIR प्रोसेस के बीच हटाए जाएंगे लाखों वोटर्स के नाम, आखिर क्या है धड़ाधड़ नाम काटने की वजह?
Gujarat SIR: गुजरात में चुनावी तैयारियों के बीच एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। राज्य भर की वोटर लिस्ट की गहराई से जांच करने पर पता चला है कि लाखों ऐसे नाम अब भी सूची में दर्ज हैं, जिनके मालिक इस दुनिया में नहीं रहे। यही नहीं, कई लोग अपने घर-परिवार के साथ कहीं और बस चुके हैं, लेकिन उनके नाम पुराने पते पर वोटर लिस्ट में मौजूद हैं।
चुनाव आयोग की यह बड़ी कवायद बताती है कि वोटर लिस्ट कितनी विशाल है और इसे अपडेट रखना कितना कठिन, लेकिन ज़रूरी है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर जब घर-घर पहुंचे, तो सामने आए आंकड़ों ने चुनावी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। इस अभियान ने राज्य की मतदाता सूची में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मृत मतदाताओं और दोहराए गए नामों का खुलासा किया है।

अभियान कैसे शुरू हुआ?
यह विशेष अभियान 4 नवंबर से पूरे राज्य में शुरू हुआ। इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने घर-घर जाकर गिनती के फॉर्म लोगों को बांटे। यह पूरा अभियान 11 दिसंबर तक चलेगा। रिलीज़ के अनुसार, बीते एक महीने में 5 करोड़ से ज़्यादा वोटरों को फॉर्म दिए जा चुके हैं। गुजरात के 33 ज़िलों में लगभग 100 फीसदी फॉर्म वितरण का काम पूरा हो गया है। अब इन फॉर्म को डिजिटाइज़ किया जा रहा है ताकि अपडेटेड वोटर लिस्ट तैयार हो सके।
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किन क्षेत्रों में डिजिटाइज़ेशन पूरा?
अब तक 182 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 में डिजिटाइज़ेशन पूरी तरह खत्म हो चुका है। ये क्षेत्र हैं:
- धनेरा और थराद (बनासकांठा)
- लिमखेड़ा और दाहोद (ST) - दाहोद ज़िला
- बयाद - अरावली ज़िला
- धोराजी, जसदान, गोंडल - राजकोट ज़िला
- केशोद - जूनागढ़ ज़िला
- मेहमदाबाद - खेड़ा ज़िला
- खंभात - आनंद ज़िला
- जलालपोर - नवसारी ज़िला
इनके अलावा डांग ज़िला सबसे आगे है, जहां 94.35% फॉर्म का डिजिटाइज़ेशन पूरा हो चुका है।
कितने वोटर लिस्ट से गायब?
रिलीज के मुताबिक:
- 17 लाख से ज़्यादा वोटर मृत होने के बावजूद लिस्ट में शामिल थे
- 6.14 लाख से ज़्यादा वोटर अपने पुराने पते से गायब मिले
- 30 लाख से ज़्यादा वोटर स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए
यह आंकड़े दिखाते हैं कि बड़ी संख्या में लोग अपने पते बदल चुके हैं या दूसरे शहरों में बस गए हैं, लेकिन लिस्ट अपडेट न होने की वजह से उनके पुराने नाम अभी भी मौजूद हैं। ये संख्या 53.14 लाख से ज्यादा है।
कितने वोटर दोहराए गए?
BLO की जांच में यह भी सामने आया कि 3.25 लाख से ज़्यादा वोटर 'रिपीटेड' कैटेगरी में आए, यानी उनके नाम एक से ज़्यादा जगहों पर दर्ज पाए गए। यह स्थिति चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इन नामों को पहचानकर सही जगह पर अपडेट किया जा रहा है।
SIR क्यों जरूरी है?
गुजरात में वोटर लिस्ट का यह बड़ा और गहराई वाला रिवीजन इसलिए अहम है ताकि:
- चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके
- हर असली वोटर का नाम सही तरीके से दर्ज हो
- मृत, दोहराए गए और गायब नामों को हटाया या सुधारा जा सके
- आने वाले चुनावों में पारदर्शिता बनी रहे
राज्य में इतनी बड़ी संख्या में गलत या पुराने नाम होना चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता पर सवाल उठाता है। यही कारण है कि यह SIR अभियान चुनाव आयोग की प्राथमिकता में है।
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