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Gujarat Election 2022: गुजरात में भी बजेगा रेवड़ी पॉलिटिक्स का डंका ? सर्वे में मिला ये जवाब

Gujarat Assembly Election 2022 Dates And Phases: गुजरात विधानसभा चुनावों की घड़ी भी आ गई है। गुजरात में शायद यह पहला चुनाव है, जहां खुलकर 'रेवड़ी' कल्चर का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुफ्त की सेवाओं की बोली लगाई गई है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या गुजरात के वोटर इन लोकलुभावन वादों से प्रभावित होंगे ? अगर हां, तो वह गुजरातियों का कौन सा वर्ग है? सर्वे के जो नतीजे आए हैं, वो हमें हैरान कर रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में वहां भारतीय जनता पार्टी को 50 प्रतिशत मत मिले थे और कांग्रेस ने काफी मेहनत करके 42 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। लेकिन, आम आदमी पार्टी वाली राजनीति ने इस प्रदेश के चुनावी समीकरण को इसबार बदल दिया है।

गुजरात में 'रेवड़ी' रणनीति पर चुनावी सर्वे

गुजरात में 'रेवड़ी' रणनीति पर चुनावी सर्वे

गुजरात के वोटर रेवड़ी कल्चर के बारे में क्या सोचते हैं, इसपर लोकनीति-सीएसडीएस ने एक सर्वे किया है। गुजरात चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी जोरदार प्रचार अभियान में जुट चुकी है। दिल्ली और पंजाब में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी के गुजरात के मैदान में उतरते ही यहां भी इसबार मुफ्त बिजली समेत कई लोकलुभावन वादे सुनाई देने लगे हैं। अरविंद केजरीवाल की पार्टी बेधड़क गुजरात में वही राजनीति में उतरी है, जिसने उसे दिल्ली और पंजाब की सत्ता दिलाई है। कांग्रेस भी पिछले कई चुनावों से लोकलुभावन वादों से जोर आजमाइश करना चाहती है। भाजपा भी राष्ट्रीय मुद्दों और गुड गवर्नेंस के अलावा लोक-कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है।

'रेवड़ी' के तलबगारों में भाजपा समर्थकों की बहुतायत-सर्वे

'रेवड़ी' के तलबगारों में भाजपा समर्थकों की बहुतायत-सर्वे

गुजरात के वोटरों पर जो ताजा सर्वे हुआ है उसके मुताबिक जवाब देने वाले लगभग आधे लोगों का मानना है कि सामान्य आदमी के लिए लोकलुभावन नीतियां जरूरी हैं। इसमें मजेदार तथ्य यह है कि ऐसी सोच रखने वाले अधिकतर वोटर बीजेपी समर्थक हैं। जो लोग यह मानते हैं कि ऐसी नीति अर्थव्यस्था के लिए नुकसानदेह हैं, उनमें से भी दो-तिहाई भाजपा समर्थक हैं। मतलब, लोकलुभावन वादों पर बीजेपी समर्थकों की राय में बहुत ज्यादा मतभेद है।

सर्वे में सभी पार्टियों के समर्थकों की राय जानिए

सर्वे में सभी पार्टियों के समर्थकों की राय जानिए

जब गुजरात के वोटरों के सामने यह सवाल रखा गया कि कई लोग सोचते हैं कि मुफ्त बिजली, मुफ्त की सेवाएं, सब्सिडी या कैश अनुदान देना अर्थव्यस्था और राज्य के विकास के लिए नुकसानदेह है। जबकि, कुछ लोग सोचते हैं कि महंगाई के समय में ऐसा करना आवश्यक है। आपकी क्या राय है? इसे अर्थव्यवस्था के लिए खराब बताने वालों में 68% बीजेपी, 8% कांग्रेस और 15% आम आदमी पार्टी के समर्थक हैं। लेकिन, सामान्य नागरिकों को राहत देने के लिए इसे जरूरी समझने वालों में भी बीजेपी के 42% और आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के 26-26% समर्थक हैं। वहीं ऐसे लोग भी हैं, जो दोनों राय रखते हैं। इसमें बीजेपी के 49%, आम आदमी पार्टी के 21% और कांग्रेस के 18% समर्थक हैं। जिन लोगों को इस सवाल का जवाब देना कठिन लगा, उनमें भाजपा के 41%, आम आदमी पार्टी के 17% और कांग्रेस के 24% समर्थक हैं।

शहरी मतदाता और पढ़े-लिखे लोगों को 'रेवड़ी' ज्यादा पसंद-सर्वे

शहरी मतदाता और पढ़े-लिखे लोगों को 'रेवड़ी' ज्यादा पसंद-सर्वे

इस सर्वे का सबसे चौंकाने वाला नतीजा ये आया है कि 'रेवड़ी' कल्चर के समर्थकों में सबसे ज्यादा लोग ज्यादा पढ़े-लिखे लोग और शहरी मतदाता नजर आ रहे हैं। जैसे सर्वे में शामिल किए गए 55% शहरी वोटरों ने लोकलुभावन नीति को सामान्य आदमी के लिए आवश्यक बताया है तो ग्रामीणों में ऐसी सोच रखने वालों की संख्या सिर्फ 39% है। लेकिन, 14% शहरी ने इसे अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक माना है तो गांव के लोगों में 13% इस संस्कृति के विरोध में हैं। निरक्षरों में 13% इसे राज्य की अर्थव्यस्था के लिए खराब मान रहे हैं तो 39% इसके हक में हैं। लेकिन, जब कॉलेज या उससे ऊपर की पढ़ाई करने वालों से पूछा गया तो 53% ऐसे मिले जो 'रेवड़ी' कल्चर के समर्थक निकले और सिर्फ 13% ने इसे राज्य की अर्थव्यस्था के लिए खराब बताया।

जो मीडिया के संपर्क में नहीं, उन्हें रेवड़ी ज्यादा पसंद नहीं-सर्वे

जो मीडिया के संपर्क में नहीं, उन्हें रेवड़ी ज्यादा पसंद नहीं-सर्वे

सर्वे में एक डेटा इस आधार पर जुटाया गया है कि मीडिया के संपर्क में आने वाले लोगों का जो अलग-अलग स्तर है, वह रेवड़ी संस्कृति के बारे में क्या राय रखते हैं। इसके मुताबिक जो लोग मीडिया के संपर्क में बिल्कुल नहीं हैं, उनमें से 20% इसे अर्थव्यवस्था के लिए खराब मानते हैं। लेकिन, 33% मानते हैं कि सामान्य आदमी के लिए यह जरूरी है। जो लोग मीडिया के कम संपर्क में हैं, उनमें से 11% इसे गलत मानते हैं, लेकिन 53% के अनुसार यह बहुत जरूरी है। जो मीडिया के मध्यम संपर्क में हैं, उनमें से 12% इसे खराब कह रहे हैं, लेकिन 48% का कहना है कि ये जरूरी है। लेकिन, जो लोग मीडिया के संपर्क में काफी ज्यादा हैं, उनमें से 12% इसे अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह और 38% जरूरी मानते हैं।

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