गांधीजी के साथ दांडी यात्रा करने वाले दादा नरसिंह पटेल नहीं रहे, PM ने किया था सम्मानित
Gujarat's Freedom fighter Narsingh Bhai Nanabhai Patel passed away at the age of 102, The only last witness of Dandi yatra
अहमदाबाद। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए दांडी मार्च में हिस्सा लेने वाले नरसिंहभाई नानाभाई पटेल अब नहीं रहे। उनका 102 साल की उम्र में निधन हो गया है। पिछले काफी समय से उनकी तबियत ठीक नहीं चल रही थी। आज न्यूजीलैंड के रोटोरुआ में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस सूचना के बाद उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

नरसिंहभाई नानाभाई पटेल अब नहीं रहे
बता दें कि, नरसिंह पटेल 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से नवसारी के समुद्र तट पर दांडी तक निकाली गई यात्रा में शामिल हुए थे। अंग्रेजों द्वारा नमक पर टैक्स लगा देने के विरोध में गांधीजी ने ऐतिहासिक दांडी मार्च शुरू किया गया था। नरसिंह पटेल तब नाबालिग थे। उनके बेटों के मुताबिक, नरसिंहभाई पटेल तब 10 वर्ष के थे। स्वतंत्रता के आंदोलनों में सक्रिय होने के चलते उन्हें कई बार कारावास में डाला गया था।

महात्मा गांधी के अभियान का हिस्सा बने
नरसिंह पटेल मूलत: मीठा कुवा, जलालपुर के रहने वाले थे। उनका जन्म 24 दिसंबर 1920 को हुआ था। बचपन से ही उनकी धार्मिक भावनाओं में रुचि थी। इसलिए उन्हें भजन और लोकगीत गाना अच्छा लगता था। 10 साल की आयु में वह पहली दफा महात्मा गांधी के अभियान का हिस्सा बने। आखिर में 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो नरसिंहभाई पटेल ने जलालपुर के दांडी में एक प्राथमिक विद्यालय में सेवा देने लगे। वहां वह प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत थे। वह चूंकि गांधीवादी विचारों से प्रभावित थे, इसलिए बच्चों को पीटते भी नहीं थे। 1964 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार प्रदान किया।

न्यूजीलैंड में रह रहे थे
नरसिंहभाई भजन और लोक गीत सुरीली आवाज़ में गाते थे। उन्हें अहमदाबाद आकाशवाणी केंद्र द्वारा भी कुछ कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित किया गया था। कुछ सालों पहले जब उनका बेटा न्यूजीलैंड में बस गया तो नरसिंह भी वहां चले गए। वर्ष 2019 में दांडी स्मारक के उद्घाटन के अवसर पर वह फिर भारत लौटे। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दांडी में उनका सम्मान किया। उन्हें सम्मानित करते हुए पीएम की तस्वीर आज सोशल मीडिया पर नजर आ रही हैं।

गांधीजी के विचारों को फॉलो करते थे
नरसिंहभाई के एक करीबी ने बताया कि, पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। आज उन्होंने 102 साल की उम्र में न्यूजीलैंड के रोटोरुआ में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक और दीपक बुझ गया।












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