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गुजरात चुनाव में बीजेपी को सता रहा है बागियों का डर, इन सीटों को लेकर बढ़ गई है चिंता

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गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बार अबतक मोटे तौर पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना ही दिख रही है। हालांकि, आम आदमी पार्टी कितना असर दिखा पाएगी, इसका पूरा अनुमान लगा पाना बहुत ही मुश्किल है। यह भी पता नहीं कि वह जितने वोट काटेगी, उसमें नुकसान बीजेपी को ज्यादा होगा या फिर कांग्रेस को ? लेकिन, इतना तय है कि सत्ताधारी दल को कई सीटों पर अपने बागियों से ज्यादा दिक्कत हो सकती है। क्योंकि, बागी उम्मीदवारों को जितने भी वोट मिलेंगे, वह भाजपा के ही वोट होंगे। बड़ी बात ये है कि बागियों की तादाद कम भी नहीं है।

गुजरात चुनाव में बीजेपी को सता रहा है बागियों का डर

गुजरात चुनाव में बीजेपी को सता रहा है बागियों का डर

गुजरात में भारतीय जनता पार्टी लगातार सातवीं बार सत्ता हासिल करने के लिए चुनाव लड़ रही है। लेकिन, कांग्रेस से आए दल-बदलुओं को टिकट देने की वजह से पार्टी की मुश्किल खत्म नहीं हो रही है। पार्टी के एक दर्जन से ज्यादा नेता बागी बनकर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर बगावत करने वाले जिन 18 बागियों को पार्टी ने निलंबित किया है, उनमें से सुरेंद्रनगर जिला पंचायत सदस्य छत्तरसिंह गुंजरिया को कांग्रेस ने ध्रांगध्रा से टिकट दे दिया है। जबकि, सत्ताधारी दल से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायकों की लिस्ट लंबी है।

पहले चरण पार्टी से निलंबित 7 बागी

पहले चरण पार्टी से निलंबित 7 बागी

पूर्व विधायक हर्षद वसावा और अरविंद लदानी, क्रमश: नांदोद और केशोद से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ये लोग भाजपा से निलंबित किए गए सात बागियों में शामिल हैं, जो पहले चरण में चुनाव मैदान में हैं। पार्टी विधायक मधु श्रीवास्तव समेत बीजेपी से निलंबित 12 बागी दूसरे चरण में निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। श्रीवास्तव 1995 से वाघोडिया से 6 बार चुनाव जीत चुके हैं और पहली बार वह निर्दलीय ही जीते थे।

बीजेपी में इन सीटों को लेकर बढ़ गई है चिंता

बीजेपी में इन सीटों को लेकर बढ़ गई है चिंता

गुजरात में इस बार मोटे तौर पर त्रिकोणीय मुकाबले का अनुमान है। बीजेपी को यही डर है कि ऐसे में बागियों के उतरने से उसके अपने वोट घट सकते हैं। खासकर पार्टी को उन सीटों पर सफलता की चिंता ज्यादा सता रही है, जहां वह 2017 के विधासभा चुनावों में कम वोटों के अंतर से जीती थी। अगर बागियों ने बीजेपी के वोटरों के बीच जरा सी भी सेंध लगाई तो सारा समीकरण उलट-पुलट हो सकता है। पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर बताया है कि वरिष्ठ नेताओं ने बागियों को समझाने का प्रयास भी किया है, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए हैं।

बीजेपी ने 42 एमएलए का टिकट काटा है

बीजेपी ने 42 एमएलए का टिकट काटा है

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार 42 विधायकों को फिर से चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, भूपेंद्रसिंह चुडासमा और सौरभ पटेल ने खुद ही चुनावों से दूरी बना ली है। 2017 में भारतीय जनता पार्टी गुजरात की 182 सीटों में से सिर्फ 99 पर जीती थी। 1995 में सत्ता में आने के बाद से यह इसका सबसे बुरा प्रदर्शन था। इस बार उसने 2017 के बाद कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए 17 विधायकों को टिकट दे दिया और पार्टी के ज्यादातर बागी इसी को लेकर असहज हैं। भाजपा के जिस नेता का पहले ऊपर जिक्र हुआ है, उनके मुताबिक कुछ जगहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं में पूरा उत्साह नहीं है और वह अधुरे मन से काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 'उन्हें लगता है कि उन्हें ऐसे नेता के लिए काम करना है, जिनका कभी उन्होंने विरोध किया था। नए नेता भी कैडरों को प्रेरित करने में समय लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति प्यार ही है कि वे अभी भी उनके साथ हैं।'

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बीजेपी को किस मोर्चे पर राहत दिख रही है ?

बीजेपी को किस मोर्चे पर राहत दिख रही है ?

भाजपा को बागियों के लिए तो चिंता है ही। लेकिन, कुछ बातें ऐसी भी हैं, जिसको लेकर पार्टी को काफी राहत भी महसूस हो रही है। 2017 के चुनाव में गुजरात में बीजेपी के सामने किसानों का मुद्दा ज्यादा गर्म था, नोटबंदी भी एक बहुत बड़ी परेशानी थी और सबसे बढ़कर पाटीदार आंदोलन ने पार्टी को दबाव में ला दिया था। इसमें कोई शक नहीं कि इन्हीं मुद्दों की वजह से बीजेपी की सीटें इतनी कम भी हो गई थीं और कांग्रेस को इसका काफी फायदा भी मिला था। लेकिन, इस बार पार्टी के खिलाफ गुजरात में इतनी नकारात्मकता फिलहाल नजर नहीं आती। पिछली बार राज्य में 70% वोटिंग हुई थी, जिसका बड़ा कारण था कि पाटीदार बड़ी तादाद में निकले थे और भाजपा के खिलाफ बड़े पैमाने पर वोट दे आए थे। इस बार यह हालात पूरी तरह उलट लग रहा है और आर्थिक आधार पर आरक्षण के 10 फीसदी कोटे पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर ने पार्टी को और राहत दे रखी है।

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English summary
Gujarat elections:Leaders within the BJP are worried about the rebel candidates. There is more problem in those seats, where the party won with less votes last time
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