गुजरात चुनाव में पीएम मोदी को 'रावण' कहने का मतलब क्या है ? इन वोटरों के मिजाज को परख लीजिए

गुजरात में पीएम मोदी का नाम आज गुजराती अस्मिता से जुड़ा हुआ लगता है। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो बयान दिया है, उससे कहीं ना कहीं भाजपा उत्साहित है। यह बात जमीन पर भी नजर आती है।

Gujarat assembly elections 2022: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करके भाजपा समर्थकों को कहीं उकसा तो नहीं दिया है ? क्योंकि, अभी तक भाजपा के अंदरूनी सूत्र बता रहे थे कि उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं विपक्ष को कमजोर देखकर सत्ताधारी दल के समर्थक वोटर बूथों तक आने में ही ढिलाई ना कर दें। उनके बीच में 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुए 'फील गुड' वाले फैक्टर के असर की भी दबी-जुबान चर्चा होने लगी थी। लेकिन, खड़गे की टिप्पणी का असर क्या हो सकता है, वह कुछ गुजराती वोटरों की भावनाओं को देखकर समझा जा सकता है, जिसे हवा देने के लिए भारतीय जनता पार्टी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।

'पर हम मोदी साहेब का मान रखते हैं'

'पर हम मोदी साहेब का मान रखते हैं'

गुजरात चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जिस तरह से 'रावण' से की है, उसपर बीजेपी यूं ही नहीं आक्रोशित है। भारतीय जनता पार्टी को पूरा अंदाजा है कि खड़गे ने क्या कर दिया है! अगर गुजराती अस्मिता की भावना को समझें तो शायद एक गुजराती वोटर बहुत कुछ बर्दाश्त कर सकता है, लेकिन 'मोदीजी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता' इस तरह की भावना हर कहीं मौजूद देखी जा सकती है। इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ गुजराती मतदाताओं से जो बात की है, उसमें यह भावना आम नजर आ रही है। मसलन, साबरकांठा जिले के एक छोटे से गांव कथपुर की चंपाबेन की भावना को ही परखने की कोशिश कीजिए। गुजराती महिलाएं अपनी मर्यादा किस तरह की लिबास में महसूस करती हैं, उनके द्वारा कसकर पकड़े गए पल्लू से अंदाजा लग सकता है। वो अपने काम में जुटी हुई कहती हैं, 'हमारे पास घर नहीं है। हर बार जब हम आवास योजना के तहत यह मांगते हैं तो स्थानीय सरपंच हमारी गुहार ठुकरा देता है और अपने लोगों की मदद करता है। हमारे गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है और ना ही पांचवीं कक्षा के बाद के बच्चों के लिए स्कूल है.....पान अमे मोदी साहेब नू मान राकछु...(पर हम मोदी साहेब का मान रखते हैं।)'

'....तो यह मोदीजी का अपमान होगा'

'....तो यह मोदीजी का अपमान होगा'

खेडब्रम्हा शहर के बाहरी इलाके में एक छोटे से गांव में सामाजिक तौर पर थोड़े अमीरों का घर है। उनके लिबासों को देखकर उनकी संपन्ना झलकती है। उनमें से ही एक वीनाबेन कहती हैं, 'अगर गुजरात उन्हें समर्थन नहीं देता है तो यह मोदीजी का अपमान होगा। हमें मोदीजी का हाथ मजबूत करना है।' 2001 से 2014 तक नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। पिछले 8 वर्षों से वह प्रधानमंत्री हैं। लेकिन, प्रदेश में आज भी उनके नाम में वह जादू है कि भाजपा सरकार के खिलाफ होने वाले हर हमले का धार कुंद कर देता है। पूरे 20 साल से मोदी नाम गुजराती अस्मिता के पर्याय के रूप में नजर आया है।

पीएम मोदी के खिलाफ हर निजी हमले से भाजपा को हुआ है फायदा

पीएम मोदी के खिलाफ हर निजी हमले से भाजपा को हुआ है फायदा

लगता है कि गुजरात में मोदी नाम के आगे आज ध्रुवीकरण के सारे हथकंडे फेल हैं! इस नाम में वह क्षमता है जो वोटरों को बीजेपी के पक्ष में और विरोध में गोलबंद कर सकता है। अभी तक सत्ताधारी बीजेपी इसका जमकर फायदा उठाती रही है। चाहे 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के 'मौत का सौदागार' वाला बयान हो या फिर आगे के चुनाव में कांग्रेस के ही मणिशंकर अय्यर का उन्हें 'नीच' कहने वाली टिप्पणी विपक्षी दल को बहुत भारी पड़ी है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक गुजरात में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष गोपाल इटालिया के द्वारा पीएम मोदी और उनकी मां के खिलाफ वाला पुराना बयान भी उस पार्टी को लेकर शुरुआती उत्साह को फीका कर चुका है।

गांधी, पटेल के बाद गुजरातियों के लिए मोदी!

गांधी, पटेल के बाद गुजरातियों के लिए मोदी!

गुजरात में पार्टी के चुनाव अभियान में शामिल बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, 'जब अपनी मातृभूमि की बात आती है तो गुजरातियों की सोच और उनका दृष्टिकोण बहुत ही अलग हो जाता है। महात्मा गांधी और सरदार पटेल के बाद प्रदेश से राष्ट्रीय कद के एक नेता की उनकी हमेशा से लालसा थी। मोदीजी ने उसे पूरा किया है और 2002 से काम करते आ रहे हैं। उनके हर कार्य और उनके ऐक्शन उस भावना को पूरा करते हैं।'

'आज का गुजरात मोदीजी की वजह से है'

'आज का गुजरात मोदीजी की वजह से है'

पूर्व बैंक कर्मचारी और गाडु कंपा गांव के पूर्व सरपंच अविंद्रभाई पटेल कभी पक्के कांग्रेसी थी। लेकिन, 1995 से वह भाजपा समर्थक हो गए। वो कहते हैं, 'यहां हर कोई जानता है कि गुजरात आज जो कुछ भी है, वहा मोदीजी की वजह से है।' उनके मुताबिक, 'मैंने कांग्रेस छोड़ दिया क्योंकि यह गुटबाजी, तुष्टिकरण की राजनीति और कम्युनल कार्ड खेलती थी। बीजेपी विकास करने वाली पार्टी थी....बीजेपी के शासन में गुजरात के गांवों में पानी और बिजली आना शुरू हुआ। हर गांव सड़कों से जुड़े हैं। आज जो गुजरात हम देखते हैं, वह मोदीजी की वजह से है।'

'मैं मोदीजी को निराश नहीं कर सकता'

'मैं मोदीजी को निराश नहीं कर सकता'

इसी तरह 100 बिगहा जमीन जोतने वाले 34 साल के एक किसान रघुभाई पटेल कहते हैं 'यदि मोदी अब ज्यादा कुछ नहीं भी करें, मैं तो उन्हीं के लिए वोट दूंगा, क्योंकि मैं उन्हें निराश नहीं कर सकता। ' उन्हीं के 75 साल के पड़ोसी हैं प्रभुभाई। वह मोदी की ओर से राज्य में किए गए काम और उनके द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के लिए उनके आभारी हैं। इसके तहत उन्हें वह वित्तीय सहायता मिली, जिससे गैंग्रीन से प्रभावित उनके दाहिने पैर को काटने में मदद मिली। उनकी पट्टियां अभी तक नहीं खुली हैं, लेकिन वे 5 दिसंबर को वोट मोदीजी के नाम पर देने का प्रण ले चुके हैं।

'मोदी का सबसे मूल्यवान कदम बच्चियों के लिए'

'मोदी का सबसे मूल्यवान कदम बच्चियों के लिए'

प्रभुभाई की बेटी दिशा और उनके 24 साल के पति ब्रिजेश चौधरी भी पीएम मोदी के समर्थक हैं। ये भी किसान हैं, लेकिन मोदी की योजनाओं को लेकर उनकी राय अपने ससुर से थोड़ी अलग है। वह कहते हैं, सबसे मूल्यवान कदम जो 'मोदी ने लिया, वह बच्चियों के लिए लिया है।' मुस्कुराते हुए उनकी पत्नी दिशा अपनी मासूम आराध्या को गोद में लिए कहती हैं, 'गर्भावस्था के दौरान मुझे हर तरह की सहायता मिली।'

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