Gujarat Election 2022: जिस मोरबी जिले में BJP का नहीं खुला था खाता, वहां अब मोदी के भरोसे 'कमल'
Gujarat Election 2022: जिस मोरबी जिले में BJP का नहीं खुला था खाता, वहां अब मोदी के भरोसे 'कमल'
Gujarat Election 2022: गुजरात के पिछले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था। भाजपा मामूली बढ़त (7) से ही बहुमत प्राप्त कर पाई थी। वह पिछले पांच बार से सत्ता विरोधी मुद्दों के बावजूद चुनाव जीतती रही है। लेकिन इस बार उसके सामने पहले से ज्यादा कठिन चुनौतियां हैं। जनता की नाराजगी से बचने के लिए भाजपा करीब 20-25 सीटों पर नये चेहरों को उतार सकती है। अगर गुजरात की भू-राजनीति पर गौर करें तो 2017 के चुनाव में भाजपा को मध्य गुजरात में सबसे अधिक सीटें मिली थीं। यह इलाका ही उसकी सत्ता का सूत्रधार था। इस क्षेत्र में सबसे अधिक 68 सीटें हैं जिसमें से भाजपा को 40 मिली थीं। कांग्रेस केवल इसी इलाके में पिछड़ गयी थी वर्ना वह सत्ता में लौट सकती थी। कांग्रेस ने उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ इलाके में भाजपा से अधिक सीटें जीती थीं। 2022 में कई कारणों से राजनीतिक परिस्थितियां बदली हुई हैं। राजनीतिक मुद्दों के अलावा मोरबी पुल हादसा भी जनमत को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा वैसे उम्मीदवारों की खोज में है जो चुनाव जीतने की योग्यता रखते हैं। इस बार बहुत सोच-विचार के बाद वह टिकट देगी।

चिंता है तभी मोदी 3 महीन में 4 बार गुजरात आये
चुनाव घोषणा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार गुजरात के दौरे किये। इससे प्रतीत हो रहा है कि इस बार गुजरात में भाजपा के लिए सब कुछ ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री ने अपने गृह राज्य में भाजपा की स्थिति मजबूत करने के लिए अगस्त से अक्टूबर के बीच चार दौरे किये। इस दौरान उन्होंने कई हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। पीएम आवास योजना के तहत करीब 45 हजार लोगों को घर मुहैया कराया। तोहफों का झड़ी लगा कर प्रधानमंत्री ने आम जनता को खुश करने की कोशिश की। गुजरात में चाहे जैसी भी राजनीतिक स्थिति हो, नरेन्द्र मोदी ही भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद हैं। अब तक उनकी लोकप्रियता हर मुद्दे पर भारी पड़ती रही है। लेकिन इस बार भाजपा को नुकसान का आशंका सता रही है। इसलिए डैमेज कंट्रोल के लिए वे तीन महीने में चार बार गुजरात आये। उनके इन दौरों से भाजपा की बूथ कमेटियों में नये जोश का संचार हुआ।
2017 में मोरबी जिले में भाजपा का खाता नहीं खुला था
पुल हादसे की वजह से मोरबी चर्चा में है। मोरबी जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं। 2017 के चुनाव में इन तीनों सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई थी। इस जिले में भाजपा का खाता नहीं खुला था। हालांकि मोरबी सीट पर जीते कांग्रेस के प्रत्याशी बृजेश मेरजा बाद में भाजपा में चले गये। वे भूपेन्द्र सरकार में मंत्री भी बने। उनके मंत्री रहते यह दर्दनाक हादसा हो गया। इससे मंत्री बृजेश मेरजा भी निशाने पर हैं। मोरबी में पाटीदार समुदाय निर्णायक स्थिति में है। हृदयविदारक घटना के बाद उनमें दुख और रोष है। पिछले चुनाव में पाटीदार समुदाय के विरोध के कारण ही भाजपा की सीटों में कमी आयी थी। मोरबी जिले की टंकारा सीट पर पाटीदार समुदाय का दबदबा है। भाजपा यहां भी हार गयी थी। पाटीदार समुदाय को खुश करने के लिए ही भूपेन्द्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था। जिले की अन्य सीट वांकानेर पर कांग्रेस का 15 साल से कब्जा है। जिस जिले में भाजपा का खाता नहीं खुला हो वहां इतनी बड़ी घटना का होना, उसकी उम्मीदों पर पानी फेरने वाला है।
मोदी की तरह कोई लोकप्रिय सीएम नहीं बना
आठ साल हो गये लेकिन गुजरात में नरेन्द्र मोदी की खाली जगह को कोई नेता नहीं भर पाया। उनकी तरह दूरदर्शी सोच वाला कोई दूसरा मुख्यमंत्री कुर्सी पर नहीं बैठा। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा के तीन मुख्यमंत्री गद्दी पर बैठे लेकिन वे जनता की आकांक्षा पर खरे नहीं उतरे। सरकार के कामकाज में कमी के कारण भाजपा की जीत का अंतर घटता गया। नरेन्द्र मोदी ने अकेले गुजरात में 13 साल तक शासन किया। लेकिन अब गुजरात ने आठ साल में 3 मुख्यमंत्री देख लिये। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये हैं। कांग्रेस राज्य सरकार के भ्रष्टाचारों का आरोप पत्र तैयार कर जनता के बीच चुनावी अभियान चला रही है। नरेंद्र मोदी के शासन काल में ऐसे हालात नहीं बने थे।
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आप की चुनौती
आम आदमी पार्टी गुजरात में एक प्रमुख चुनौती बन कर उभर रही है। उसने भाजपा सरकार की शिक्षा नीति और स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ एक आक्रामक अभियान चला रखा है। हालांकि कांग्रेस, आप को भाजपा की भी टीम कह कर उसे खारिज कर रही है। लेकिन अरविंद केजरीवाल पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरे हैं। अब यहां विकास के गुजरात मॉडल और दिल्ली मॉडल के बीच तुलना हो रही है। भूपेन्द्र पटेल सरकार कामकाज की कसौटी पर परखी जा रही है। राज्य सरकार के कमजोर प्रदर्शन से मोदी की मेहनत बढ़ गयी है। चुनाव की घोषणा के बाद नरेंद्र मोदी की पहली चुनावी रैली रविवार को होगी। भावनगर, वलसाड और सुरेन्द्र नगर में वे सभा को संबोधित करेंगे। अब भाजपा की नाव का नरेंद्र मोदी ही खेवनहार हैं।












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