Gujarat Election 2022: क्या मोदी-हिंदुत्व के सहारे पार लगेगी BJP की नैय्या? कांग्रेस-AAP ने मुश्किल की चुनौती
Gujarat Election: गुजरात में इस बार भारतीय जनता पार्टी के सामने सिर्फ कांग्रेस की चुनौती नहीं है, बल्कि इस बार उसके सामने आम आदमी पार्टी की भी चुनौती है। गुजरात में 1995 के बाद से भारतीय जनता पार्टी का शासन है, ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने इस गढ़ को बचाने की है। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी खास तौर पर मोदी मैजिक और जातिगत समीकरण के दम पर एक बार फिर से सत्ता में बने रहने की पुरजोर कोशिश कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था और इसके नंबर कम होकर 99 पर पहुंच गए थे। पार्टी को बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 7 सीटें अधिक मिली थी।
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भाजपा की चुनौती
हालांकि गुजरात में भाजपा के खिलाफ नकारात्मक माहौल नहीं है, जिस तरह से पिछले चुनाव में पाटीदार और ओबीसी ने खुलकर भाजपा का विरोध किया था। लेकिन पिछले दो दशक से जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी का गुजरात में जीत का आंकड़ा कम हुआ है वह पार्टी के लिए जरूर चिंता का विषय है। ऐसे में भाजपा इस बात को लेकर अपनी रणनीति जरूर बनाएगी कैसे कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी की चुनौती का सामना किया जाए और पार्टी को एक बार फिर से पूर्ण बहुमत दिलाया जाए।

मोदी फैक्टर के भरोसे भाजपा
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ा फैक्टर मोदी का है। पार्टी इस बात को हर मंच पर भुनाती है। भाजपा के चुनाव प्रचार का यह सबसे बड़ा पहलू है और प्रचार में पार्टी मोदी फैक्टर का जिक्र करती है। भाजपा का चुनाव प्रचार मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी के इर्द-गिर्द रहता है। पीएम मोदी के विजन, राष्ट्रीय सुरक्षा, लगातार मोदी का गुजरात दौरा, देश की छवि को दुनियाभर में बेहतर करने, सकारात्मक, मजबूत नेता का जिक्र पार्टी अपने अभियान में कर रही है। भाजपा के चुनाव प्रचार में जो बैनर लगते हैं उसमे मुख्य रूप से फ्लाईओवर, नए हाउसिंग प्रोजेक्ट, इंडस्ट्रियल पार्क आदि की तस्वीर होती है। भाजपा के नेता दावा करते हैं कि युवा पीढ़ि तो कांग्रेस के शासन को भूल चुकी है।

जाति, समुदाय और हिंदुत्व
गुजरात में जाति का समीकरण काफी अहम है। एक तरफ जहां कांग्रेस का अभियान मुख्य रूप से पाटीदार और गैर पाटीदर, ओबीसी गुट, दलित, एसटी, मुस्लिम पर केंद्रित है। वहीं आम आदमी पार्टी अपना अभियान मुख्य रूप से मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा पर आधारित है। प्रदेश में हिंदुत्व का मुद्दा काफी अहम है। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल नोट पर लक्ष्मी की तस्वीर की वकालत कर रहे हैं, अयोध्या, चार धाम की फ्री यात्रा की बात कर रहे हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी का मुख्य फोकस पाटीदारों पर है। भाजपा ने 38 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं, जिसमे 12 विधायक ऐसे हैं जो बड़े अंतर से चुनाव जीते थे, भाजपा ने मुख्य रूप से पाटीदार चेहरों को बरकरार रखा है।

कांग्रेस के ये आंकडे़ भाजपा के लिए मुश्किल
सूरत और सौराष्ट्र की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने यहां पाटीदार आंदोलन से जुड़े लोगों को मैदान में उतारा है। भाजपा ने कई छोटी जातियों जैसे गोस्वामी, प्रजापति, अहिर, कोहली, एसटी को अपनी पार्टी में जगह दी है। यहां तक कि बागी कांग्रेस के नेताओं को भी भाजपा ने अपने साथ लिया है। लेकिन कांग्रेस के सिर्फ उन्ही बागियों को भाजपा ने साथ लिया है जिनमें पार्टी जीत की संभावना देख रही है। भाजपा और कांग्रेस के बीच जीत के अंतर की बात करें तो 1995 में 10 फीसदी वोट का अंतर था, जबकि 2017 में यह घटकर 7.5 फीसदी हो गया है। 1995 में कांग्रेस को 76 सीटों का नुकसान हुआ था जबकि 2017 में पार्टी 22 सीटों का अंतर हो गया था।

राहुल गांधी गुजरात से नदारद
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में ही गुजरात में पार्टी का चुनाव प्रचार चल रहा है। ऐसे में लगातार इसको लेकर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर क्यों राहुल गांधी गुजरात के चुनाव प्रचार से नदारद हैं। कांग्रेस तकरीबन एक दर्जन विधायकों को पार्टी छोड़ने से रोकने में विफल रही है। यहां तक कि पार्टी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष ने भी कांग्रेस छोड़ दी। बहरहाल बावजूद इसके राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में भाजपा की सीधी लड़ाई कांग्रेस से है, लोग आम आदमी पार्टी की मुफ्त की घोषणाओं पर आकर्षित नहीं होंगे।












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