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Gujarat Election: गुजरात की शहरी सीटों पर बीजेपी की स्थिति क्या है ? AAP और ओवैसी ने कितना बदला समीकरण

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Gujarat Assembly Elections 2022: गुजरात ही नहीं, देशभर में शहरी चुनाव क्षेत्रों में भाजपा आमतौर पर दबदबा बनाने में सफल रहती है। बीजेपी जब से चुनावी राजनीति में सक्रिय हुई है यह तभी से परंपरागत तौर पर देखा जा सकता है। जाहिर है कि गुजरात को तो विपक्षी आरएसएस और भाजपा का प्रयोगशाला कहकर बुलाते हैं तो यहां की शहरी सीटों पर उसका प्रभाव रहना स्वाभाविक है। लेकिन, गुजरात में इस बार प्रदेश की चुनावी राजनीति के दो-दो नए खिलाड़ी गंभीरता के साथ मैदान में उतरे हैं। एक तो अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी है और दूसरी है असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम। अनुमान है कि ये दोनों ही दल शहरी चुनाव का समीकरण बदल सकते हैं।

गुजरात की शहरी सीटों पर भाजपा का रहा है दबदबा

गुजरात की शहरी सीटों पर भाजपा का रहा है दबदबा

गुजरात के 8 नगर निगमों के 44 विधानसभा क्षेत्रों को शहरी सीटों में गिना जाता है। ये नगर निगम हैं- गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, जामनगर, राजकोट, भावनगर और जूनागढ़। ये शहरी सीट बीजेपी के गढ़ माने जाते हैं। 1995 के चुनावों से ही बीजेपी का इन सीटों पर दबदबा रहा है। इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शनों की वजह से भारतीय जनता पार्टी विपक्षी दल या अबतक कांग्रेस पर आसानी से बढ़त बनाती रही है। लेकिन, इस बार आम आदमी पार्टी भी पूरा दम लगा रही है और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी शहरी सीटों पर सक्रियता दिखाकर समीकरण को बदलने की कोशिश की है।

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2017 में भी बीजेपी ने अपना शहरी किला बचा लिया था

2017 में भी बीजेपी ने अपना शहरी किला बचा लिया था

2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 44 शहरी सीटों में से 40 सीटों पर कब्जा किया था। 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए सबसे मुश्किल चुनाव था। पार्टी 182 सीटों में से सिर्फ 99 ही जीती थी। पाटीदार आंदोलन की वजह से ग्रामीण इलाकों खासकर सौराष्ट्र में पार्टी की स्थिति बहुत ही कठिन हो गई थी। बावजूद इसके शहरी सीटों पर उसका दबदबा लगभग कायम रहा और उसे पिछली बार के मुताबिक सिर्फ एक सीट का नुकसान हुआ और वह 39 सीटों पर जीतने में सफल रही। इस एक सीट का झटका अहमदाबाद में लगा था, जहां 2012 में 16 में से वह 13 सीटें जीती थी।

सूरत से है आम आदमी पार्टी को है काफी उम्मीद

सूरत से है आम आदमी पार्टी को है काफी उम्मीद

2012 और 2017 के दोनों चुनावों में भाजपा सूरत (12) और वडोदरा (5) की सभी सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार सूरत की शहरी सीटों को लेकर ज्यादा चर्चा हो रही है। क्योंकि, अबकी बार आम आदमी पार्टी ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के कुछ बड़े पाटीदार नेताओं पर यहां से दांव पर लगाया है। जिसमें गोपाल इटालिया, अल्पेश कथीरिया और धार्मिक मालविया जैसे नेता शामिल हैं। 17 नवंबर को सूरत पूर्व से आम आदमी पार्टी के कंचन जरीवाला ने पार्टी के अंदर गुटबाजी का आरोप लगाते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया था। हालांकि, इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर उनके अपहरण का आरोप लगाया था, जबकि बीजेपी ने आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया था।

अहमदाबाद की कुछ सीटों पर परिणाम बदलेगी एआईएमआईएम ?

अहमदाबाद की कुछ सीटों पर परिणाम बदलेगी एआईएमआईएम ?

अगर सूरत में आम आदमी पार्टी को एक नए फैक्टर के तौर पर देखा जा रहा है तो अहमदाबाद के कुछ मुस्लिम-बहुल सीटों पर ओवैसी की एआईएमआईएम की एंट्री से चुनावी गणित बदलने का अनुमान लगाया जा सकता है। ये शहरी सीटें हैं- जमालपुर-खड़िया, दरियापुर, दानी लिम्डा, बापू नगर और वेजलपुर। वैसे बापू नगर से एआईएमआईएम के शहनवाज खान ने कांग्रेस के पक्ष में अपना नामांकन वापस ले लिया है। ओवैसी की पार्टी ने पूरे प्रदेश में 13 उम्मीदवार उतारे हैं।

'शहरी इलाकों में कोई बीजेपी के करीब भी नहीं है'

'शहरी इलाकों में कोई बीजेपी के करीब भी नहीं है'

गुजरात के शहरी क्षेत्र के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है, 'अल्पसंख्यक बहुल कुछ शहरी सीटों जैसे कि अहमदाबाद के जमालपुर- खड़िया, दरियापुर और दानी लिम्डा को छोड़कर हम किसी शहरी क्षेत्र में कोई बड़ा विरोध नहीं देखते हैं। इसका एक बड़ा कारण 1980 और 1990 के दशक में हुई सांप्रदायिक हिंसा हैं, जो अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा ने देखे हैं। उसके बाद बीजेपी सत्ता में आई है और लोगों ने अंतर देखा है। शहरी मतदाता के लिए सांप्रदायिक सुरक्षा एक मुख्य विषय है और ठीक इसी के चलते कोई भी पार्टी शहरी इलाकों में बीजेपी के करीब भी नहीं है। ' उन्होंने ये भी कहा कि 'और आफताब पूनावाला-श्रद्धा वाकर जैसी घटना से शहरी लोग बीजेपी के पक्ष में और एकजुट हो सकते हैं, जो कि मुख्य रूप से शिक्षित हैं। ऐसी घटनाओं के बाद लोग यह सोचकर कट्टर हिंदुत्व की लाइन लेंगे कि बीजेपी का कोई विकल्प नही है।'

हम 25 से 30 शहरी सीटों पर जीत रहे- आम आदमी पार्टी

हम 25 से 30 शहरी सीटों पर जीत रहे- आम आदमी पार्टी

लेकिन, आम आदमी पार्टी का मानना है कि गुजरात के शहरों में इस बार हिंदुत्व के मुद्दे पर नहीं, लोगों की ओर से सामना किए जाने वाले असल मुद्दों पर चुनाव होंगे। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता योगेश जदवानी ने तो दावा किया है कि शहरी सीटों पर उनकी पार्टी को 25 से 30 सीटें तक मिलेंगी। उन्होंने कहा, 'इस बार पहली बार राज्य मुद्दा आधारित राजनीति देख रहा है।' उन्होंने कहा कि 'शहरी क्षेत्रों में लोग शिक्षा, बिजली और किराए के बढ़ते खर्चे से परेशान हैं। इसलिए अरविंद केजरीवाल की ओर से दी जा रही 300 यूनिट फ्री बिजली, फ्री हेल्थ,मुफ्त शिक्षा की गारंटी के प्रति आकर्षित हैं। हम शहरों में 25-30 सीटें जीतने जा रहे हैं।'

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कांग्रेस को भी है अपने वादों पर उम्मीद

कांग्रेस को भी है अपने वादों पर उम्मीद

हालांकि, हार कांग्रेस भी नहीं मान रही है। उसे उम्मीद है कि शहरी सीटों पर इस बार उसका प्रदर्शन बेहतर होगा। पार्टी प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा, '2017 में हमने शहरी इलाकों में बहुत ही कड़ी मेहनत की थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। लेकिन, 2022 में हमें पूरा भरोसा है कि हमारा प्रदर्शन बेहतर होगा।' उनका कहना है, 'शहरी इलाकों में चार मुख्य मुद्दे हैं- शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और टैक्स। और लोगों ने महसूस कर लिया है कि बीजेपी से अलग हम असल मुद्दों पर बात करते हैं। हमने शहरी रोजगार गारंटी स्कीम का वादा किया है। इसलिए हमें उम्मीद है।'

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English summary
Gujarat Election 2022:The BJP has so far dominated the 44 urban seats in Gujarat. This time the party has more hope. Aam Aadmi Party and Congress believe in their election promises
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