गुजरात चुनाव में 2007 की जीत का वह रिकॉर्ड, जिसे 2022 में तोड़ पाना लगभग नामुमकिन है

गुजरात में 2007 में जो विधानसभा चुनाव हुए थे, उसमें दो प्रत्याशियों ने जीत का ऐसा रिकॉर्ड कायम किया था, जिसे तोड़ पाना आज लगभग नाममुकिन लगता है। उन दोनों में से एक रिकॉर्ड देश के गृहमंत्री अमित शाह के नाम है। तब वे गुजरात विधानसभा की सरखेज सीट से दो लाख तीस हजार से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीते थे और विधानसभा चुनाव में यह अंतर बहुत ही विशाल है। अमित शाह तब गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में भी गृहमंत्री ही हुआ करते थे। लेकिन, अगर 2007 में कोई प्रत्याशी इतने ज्यादा वोटों से जीत सकता था तो आज क्यों नहीं ? यह सवाल महत्वपूर्ण है।

गुजरात चुनाव में 2007 की जीत का वह रिकॉर्ड

गुजरात चुनाव में 2007 की जीत का वह रिकॉर्ड

गुजरात में 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में दो राजनेताओं ने जीत का ऐसा रिकॉर्ड बनाया था, जिसके फिलहाल मौजूदा चुनाव में भी टूटने की उम्मीद नहीं दिख रही है। यह दोनों रिकॉर्ड गुजरात के पूर्व सिंचाई मंत्री नरोत्तम पटेल और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नाम दर्ज है। तब नरोत्तम पटेल ने विधानसभा चुनाव में 3.47 लाख से भी ज्यादा अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह जो तब राज्य के गृहमंत्री हुआ करते थे, उन्होंने 2.36 लाख से भी अधिक वोटों के अंतर से चुनावी परचम लहराया था।

परिसीमन के बाद बदल गया पूरा गणित

परिसीमन के बाद बदल गया पूरा गणित

2022 के विधानसभा चुनावों में जीत के इस अंतर का रिकॉर्ड टूटने की संभावना इसलिए नहीं है, क्योंकि 2012 में हुई परिसीमन प्रक्रिया के चलते चुनावी गणित अब पूरी तरह से बदल चुका है। क्योंकि, आज की तारीख में गुजरात के 182 विधानसभा क्षेत्रों में से 172 सीटों पर मतदाताओं की कुल संख्या 2007 में सूरत की चोर्यासी विधानसभा में नरोत्तम पटेल की जीत के अंतर से भी कम हो चुकी है। परिसीमन की प्रक्रिया 2011 की जनगणना के बाद की गई थी। 2007 में चोर्यासी विधानसभा क्षेत्र में 15.94 लाख वोटर थे, जबकि अमित शाह वाली अहमदाबाद की सरखेज सीट पर तब 10.26 लाख वोटर थे।

182 सीटों पर औसतन 2.70 लाख वोटर

182 सीटों पर औसतन 2.70 लाख वोटर

परिसीमन के बाद चोर्यासी में वोटरों की संख्या घटकर 5.65 लाख रह गई है। हालांकि, यह अभी भी गुजरात में सबसे ज्यादा है। आज की तारीख में गुजरात में सिर्फ 10 ही विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां मतदाताओं की कुल संख्या 2007 में पटेल की जीत के अंतर से ज्यादा है। वैसे राज्य की कुल 182 सीटों पर वोटरों की औसत संख्या 2.70 लाख है। हालांकि, सूरत उत्तर में सिर्फ 1.63 लाख वोटर ही हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है, '2012 में सरखेज को खत्म करके पास के घाटलोदिया और दसक्रोई से मिला दिया गया। चोर्यासी के मामले में इस सीट के हिस्सों को पास के विधानसभा सीटों के साथ विलय कर दिया गया। यहां तक कि नरोदा से बीजेपी एमएलए माया कोडनानी का 2007 के चुनाव में 1..8 लाख वोटों से जीत वाला रिकॉर्ड भी वहां आज तक नहीं टूट पाया है।'

घाटलोदिया में सीएम भूपेंद्र पटेल 1.18 लाख वोटों से जीते थे

घाटलोदिया में सीएम भूपेंद्र पटेल 1.18 लाख वोटों से जीते थे

घाटलोदिया की नई सीमा निर्धारित होने का असर 2012 में आनंदीबेन पटेल (उत्तर प्रदेश की राज्यपाल) की जीत में भी दिखा था, जब वो वहां से 1.1 लाख वोटों के अंतर से जीती थीं। 2017 में उन्होंने पहली बार के विधायक और मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के लिए सीट छोड़ी थी, जो 1.18 लाख वोटों के अंतर से जीते थे और 2021 में उनके सीएम बनने के लिए एक बड़ा कारण यह भी माना जाता है।

क्यों 2022 में वह रिकॉर्ड तोड़ पाना लगभग नामुमकिन है

क्यों 2022 में वह रिकॉर्ड तोड़ पाना लगभग नामुमकिन है

2007 में अमित शाह को सरखेज में 4.07 लाख वोट मिले थे और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार शशिकांत पटेल को बुरी तरह पराजित किया था। वहीं चोर्यासी में पटेल को 5.84 लाख वोट मिले थे। राजनीति के जानकार यह मानकर चल रहे हैं कि इस बार के चुनाव में नरोदा सीट पर 2007 में कोडनानी के द्वारा कायम किया गया जीत का रिकॉर्ड तो टूट सकता है, लेकिन जो रिकॉर्ड अमित शाह और पटेल बना चुके हैं, वह तोड़ पाना लगभग नामुमकिन है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+