गुजरात के गंगाभाई: सरकार ने कुछ नहीं किया तो खुद भागीरथ बन गए, डेढ़ साल में कुआं खोद दिया
GangaBhai Pawar from Dang (Gujarat) digging A well to solution of Water crisis, know his story
डांग। बिहार के दशरथ मांझी जैसे देश में अनेक मेहनतकश इंसान हैं। ऐसे इंसानों की कहानियां हमारे लिए प्रेरणा रही हैं। एक अकेला इंसान भी क्या-कुछ कर गुजरता है ये कहीं आपने भी जरूर देखा तो होगा। यहां हम आपको आज गुजरात के एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहे हैं, जिसने जल-संकट खत्म करने के लिए कुआं खोद डाला। वो भी पक्के-बंजर धरातल में। ऐसा करते उन्हें डेढ़ साल लग गया, लेकिन फिर भी पानी पाने की खातिर जुटे रहे।

गुजरात के गंगाभाई
यह शख्स हैं- गुजरात के अहवा इलाके में रहने वाले गंगाभाई पवार। वह खेतों में काम करते हैं। उनके इलाके में पेयजल की किल्लत रही है। ग्रामीणों को बरसों से पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा था। गंगाभाई बताते हैं कि, उन्होंने पानी की किल्लत दूर करने के लिए सरपंच से मदद मांगी, लेकिन कुआं खोदने के लिए 60,000 रुपए मांगे गए। पवार कहते हैं कि, "सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए थी। मगर, ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि, 60,000 रुपये की मांग की गई। मेरे पास यूं देने के लिए 100 रुपये भी नहीं थे।"

सरकार पानी की समस्या दूर न कर पाई
गंगाभाई ने कहा, "हमें पानी चाहिए था। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। इसलिए मैंने अपनी जमीन पर कुआं खोदना शुरू किया। कई मर्तबा मैंने दिन-रात की परवाह नहीं की।"
बकौल गंगाभाई, "हमारा निवास गुजरात के डांग क्षेत्र में है, जहां पथरीली भूमि है। जब मैंने कुआं खोदना शुरू किया था तो चट्टानें निकलीं। इससे मुझे हताशा हुई। मैं फिर भी खोदता रहा। मुझे अपने दूसरे प्रयास में पानी मिल गया।"

खुद ही बन गए 'भागीरथ'
गंगाभाई ने कहा कि, "यह जो आप देख रहे हैं..32 फीट का कुआं। ये मैंने अकेले ही खोदा है। इस काम में मुझे 1.5 साल लग गया। अब पीने योग्य पानी मिलेगा, तो हमारी जिंदगी सुधर जाएगी।'












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