गुजरात के तट पर दिखी 15 फीट लंबी दुर्लभ मछली 'डॉल्फिन', गांववाले क्‍यों दफनाने जुटे?

नवसारी/वलसाड। भारत में सबसे लंबी तटरेखा वाले राज्‍य गुजरात में अजब-अनोखे जीव-जंतु दिखते रहते हैं। अब यहां नवसारी जिले के बिलिमोरा डॉल्फिन नजर आई है। हालांकि, जो डॉल्फिन स्‍थानीय लोगों ने देखी, वो मृत थी। बताया जा रहा है कि, डॉल्फिन एक मछली पकड़ने गए शख्‍स के जाल में फंस गई थी, बाद में वो उसे वहीं पड़ा छोड़कर भाग गया। इसी तरह मृत डॉल्फिन गुजरात में वलसाड जिले के उमरगाम तालुक के नरगोल गांव में देखी गई थीं।

गुजरात में लोगों को दिखी दुर्लभ मछली

गुजरात में लोगों को दिखी दुर्लभ मछली

डॉल्फिन समुद्र में पाई जाने वाली एक दुर्लभ मछली होती है, जो बेहद समझदार, संवेदनशील मानी जाती है। डॉल्फिन द्वारा इंसानों को बचाए जाने के किस्‍से लोगों में मशहूर हैं। डॉल्फिन बहुतायत में दक्षिण अमेरिकी देशों में मिलती हैं। भारत में इन मछलियों को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया जा चुका है। एक गुजराती समाचार संस्‍था की रिपोर्ट के अनुसार, डॉल्फिन हाल ही में वलसाड के समुद्र तट पर मिली, जिसे देखकर लोगों को बड़ा अचरज हुआ। वलसाड के अलावा एक डॉल्फिन नवसारी के गणदेवी तालुक के बिलिमोरा में लोगों को मिली है।

भट गांव में समुद्र तट पर मिली, लंबाई 15 फीट

भट गांव में समुद्र तट पर मिली, लंबाई 15 फीट

बिलिमोरा के लोगों का कहना है कि, उनका भट गांव में समुद्र के किनारे है। वहीं, उन्‍हें ये अद्भुत समुद्री जीवन नजर आया। हालांकि, वह मृत था। उसकी पहचान डॉल्फिन के रूप में ही की गई। उसकी लंबाई लगभग 15 फीट थी। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं, सूचना संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी गई है। एक बुजुर्ग ने कहा कि, डॉल्फिन मछली इंसानों की दोस्‍त मानी जाती है। जब लोग इनको डूबते नजर आते हैं तो ये पानी में बचाने आ जाया करती हैं।' बहरहाल, मृत डॉल्फिन को समुद्र तट पर ही दफनाने की तैयारी शुरू कर दी गई हैं।

यहां पिछले हफ्ते 2 डॉल्फ़िन मृत पाई गईं

यहां पिछले हफ्ते 2 डॉल्फ़िन मृत पाई गईं

इससे पहले वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में नारगोल समुद्र तट पर दो डॉल्फ़िन मृत पाई गई थीं। उस घटना की सूचना गांव के बुजुर्गों और सरपंच को दी गई, पहली दफा स्थानीय लोगों और मछुआरों को उसकी जानकारी हुई थी। गांव के सरपंच ने उमरगाम सामाजिक वानिकी विभाग की टीम को सूचित किया कि नरगोल समुद्र तट पर मृत डॉल्फ़िन सड़ी-गली अवस्था में मिली हैं। वहीं, पशु चिकित्सा दल पहुंचा तो उनका पोस्टमार्टम किया गया। उसके बाद उन्‍हें दफना दिया गया।

अब विलुप्ति की कगार पर हैं डॉल्फिन

अब विलुप्ति की कगार पर हैं डॉल्फिन

एक अधिकारी ने कहा कि, इस क्षेत्र में एक साथ दो डॉल्फ़िन के मृत पाए जाने के अलावा पिछले तीन वर्षों में 5 से अधिक डॉल्फ़िन मृत पाई गई हैं। डॉल्फिन का रहने का ठिकाना समुद्र और नदियां होती हैं। डॉल्फिन को अकेले रहना पसंद नहीं हैं, ये सामान्यत: समूह में रहना पसंद करती हैं। इनके एक समूह में 10 से 12 सदस्य होते हैं। हमारे भारत में डॉल्फिन गंगा नदी में भी पाई जाती है, लेकिन गंगा नदी में मौजूद डॉल्फिन अब विलुप्ति की कगार पर हैं।

भारतीय उपमहाद्वीप में यहां मिलती हैं

भारतीय उपमहाद्वीप में यहां मिलती हैं

वन्‍यजीव एक्सपर्ट्स का कहना है कि, भारतीय उपमहाद्वीप में डॉल्फिन भारत, बांग्लादेश, नेपाल तथा पाकिस्तान में देखी जा चुकी हैं। यहां पर ये मुख्यतः गंगा नदी में तथा सिंधु नदी, पाकिस्तान के सिंधु नदी के जल में पाई जाती हैं। भारत सरकार ने 18 मई 2010 को डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। भारतीय शहर गुवाहाटी में इसे आधिकारिक जीव की मान्‍यता है।

2 दशक से ज्‍यादा इन मछलियों की उम्र

2 दशक से ज्‍यादा इन मछलियों की उम्र

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डॉल्फिन समुद्र और नदियों में अपने भोजन को सूंघ कर तलाशती है, इस मछली में सूंघने की भरपूर क्षमता होती है। मादा डॉल्फिन से ज्यादा नर डॉल्फिन की लम्बाई होती है। इन मछलियों की औसत आयु करीब 27 साल मानी गयी है।

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