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जेल में रहते हुए 8 साल में हासिल कीं 31 डिग्रियां, बाहर आते ही मिली सरकारी नौकरी, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

अहमदाबाद। क्या आपने कभी सुना है कि कोई जेल में रहकर ही बहुत सारी डिग्रियां कर ले और फिर छूटते ही सरकारी नौकरी पा ले? यहां आज आपको हम ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। मामला गुजरात के भावनगर शहर का है। जहां के भानूभाई पटेल को किसी जुर्म में जेल की सजा हुई थी। भानू पटेल जेल चले गए। वहीं, रहकर उन्होंने 8 साल में 31 डिग्रियां हांसिल कीं।

59 वर्षीय भानू पटेल अब तक 54 डिग्रियां ले चुके

59 वर्षीय भानू पटेल अब तक 54 डिग्रियां ले चुके

जब जेल से बाहर आए, तो उन्हें न सिर्फ सरकारी नौकरी का ऑफर मिला बल्कि, भानू पटेल का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया और यूनिवर्सल रिकार्ड फोरम तक में दर्ज दर्ज हो गया। संवाददाता ने बताया कि, ऐसा बहुत कम होता कि जेल जाने के बाद कोई कैदी अपना भविष्य बनाने में जुट जाए। मगर, 59 साल के हो चुके भानू पटेल इसके गवाह हैं।

बस इसी जुर्म में हो गई थी 10 साल की सजा

बस इसी जुर्म में हो गई थी 10 साल की सजा

भानू पटेल मूलत: भावनगर की महुवा तहसील के निवासी हैं। बताया जाता है कि, बीजे मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद 1992 में मेडिकल की डिग्री लेने के लिए वह अमेरिका गए। उनका एक दोस्त स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में जॉब करते हुए तनख्वाह भानूभाई के अकाउंट में ट्रांसफर करता था। इसी कारण से उनके उूपर फॉरेन एक्सचेंज रेग्युलेशन एक्ट (FERA) कानून के उल्लंघन का आरोप लगा और इसी मामले को लेकर 50 साल की उम्र में उन्हें 10 साल की सजा होने पर अहमदाबाद जेल भेज दिया गया।

जेल में भी हिम्मत नहीं हारी, यूं लगे रहे

जेल में भी हिम्मत नहीं हारी, यूं लगे रहे

मगर, जेल भेज दिए जाने पर भी भानू पटेल ने हिम्मत नहीं हारी और वहां पढ़ाई शुरू कर दी। पढ़ाई करते करते सिर्फ 8 साल में उन्होंने 31 डिग्रियां हासिल कीं। वैसे तो जेल जाने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिलती, लेकिन, भानूभाई पटेल को रिहा होते ही अंबेडकर यूनिवर्सिटी से जॉब ऑफर हुई। वहां नौकरी करते हुए 5 सालों में भानूभाई ने 23 और डिग्रियां भी प्राप्त की। इस तरह अब तक वह 54 डिग्रियां ले चुके हैं।

उनकी किताबें भी मचा रहीं धूम, बनाए कई रिकॉर्ड

उनकी किताबें भी मचा रहीं धूम, बनाए कई रिकॉर्ड

कोरोना लॉकडाउन के दरम्यान एवं जेल में बीते अपने अनुभवों पर भानू पटेल ने गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में तीन किताबें भी लिखी हैं। उनकी गुजराती किताब का नाम 'जेलना सलिया पाछल नी सिद्धि' और अंग्रेजी में 'BEHIND BARS AND BEYOND' है। भानू पटेल 13वीं विधानसभा चुनावों में प्रिसाइडिंग ऑफिसर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनके द्वारा लिखी गई किताबें भी मार्किट में आ गई हैं।

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