गुजरात: भाजपा सांसद वसावा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया, एक दिन पहले पार्टी छोड़ दी थी
भरूच। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके मनसुख भाई वसावा अभी भाजपा में ही रहेंगे। एक दिन पहले ही किन्हीं कारणों के चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही कहा था कि, संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे। इसे सत्ताधारी दल भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। हालांकि, अब भाजपा के लिए राहत भरी खबर है। दरअसल, वसावा ने अपना इस्तीफा पत्र भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भेजे जाने के एक दिन बाद वापस ले लिया है। यानी वह अब इस्तीफा नहीं दे रहे।

बता दिया जाए कि, वसावा वर्तमान में गुजरात के भरूच से सांसद हैं। वह छह बार सांसद रह चुके हैं। कुछ ही समय पहले उन्होंने गुजरात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से मुलाकात की थी। बताया जाता है कि, वह कुछ मुद्दों को लेकर नाराज थे, इसीलिए पार्टी छोड़ने का फैसला किया। मगर, फिर भाजपा आलाकमान सक्रिय हो गई। जिसके बाद उन्हें अपना इस्तीफा वापस लेना पड़ा है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को लिखे पत्र में उन्होंने बस इतना कहा था कि, 'मैंने हमेशा पार्टी के साथ वफ़ादारी निभाई है। भाजपा और जिंदगी के सिद्धांत का पालन करने में बहुत सजगता रखी, लेकिन आखिरकार मैं एक इंसान हूं और इंसान से गलती हो जाती हैं। अब पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं।' इसी के साथ यह बात भी सामने आने लगी कि, वसावा लोकसभा सत्र शुरू होने से पहले अपने सांसद पद से भी इस्तीफा दे देंगे।
हाल ही इस वजह से आए थे सुर्खियों में
वसावा भाजपा के ऐसे सांसद हैं, जो राज्य सरकार को निशाने पर लेने वाले बयान दे चुके हैं। वह हाल ही तब सुर्खियों में आए, जब मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पत्र लिखकर कहा कि गुजरात में आदिवासी महिलाओं की तस्करी हो रही है। वहीं, सरकार आदिवासियों के संरक्षण के दावे करती रही है। इसके अलावा दुनिया की सबसे उूंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को लेकर भी वसावा ने प्रधानमंत्री मोदी को लेटर लिखा था। जिसमें उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास इको-सेंसेटिव जोन रद्द करने की मांग की थी। बता दें कि, वसावा खुद एक आदिवासी नेता हैं और लंबे समय से इस समुदाय के लिए आवाज उठाते रहे हैं।












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