स्मृति ठक्कर बनीं गुजरात की पहली प्लॉज्मा डोनर, 17 दिन में कोरोना को हराकर वॉरियर साबित हुईं - VIDEO
अहमदाबाद। कोरोना वायरस को मात दे चुकीं स्मृति ठक्कर कोरोना वॉरियर बन गई हैं। स्मृति ने अपना प्लॉज्मा (जीवाणु) डोनेट किया है। ऐसा करने वाली वह गुजरात की पहली शख्स हैं। वह कोरोना से तब पीड़ित हुईं, जब यूरोप की यात्रा से लौटी थीं। हालांकि, अहमदाबाद के हॉस्पिटल में भर्ती होने के 17 दिनों के भीतर ही वह कोरोना से मुक्त हो गईं।

23 साल की स्मृति ठक्कर पहली प्लॉज्मा डोनर
डॉक्टरों का कहना है कि, अब उनके ब्लड से प्लॉज्मा अलग कर कोरोना पीड़ित मरीजों को चढ़ाया जाएगा, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। डॉक्टरों की ही मदद से गुजरात सरकार ने इस तरह का प्रयोग शुरू किया है। एक डॉक्टर ने बताया कि, किसी खतरनाक रोग से स्वस्थ हुए मरीज के शरीर के एंटीबॉडीज के जरिए गंभीर मरीज का इलाज करना आसान हो जाता है। ऐसे में हम भी अब स्मृति के प्लॉज्मा को कोरोना से संक्रमित अन्य गंभीर मरीजों के उपचार के लिए इस्तेमाल करेंगे।

आईसीएमआर ने दिया इस तरह के ट्रीटमेंट को अप्रूवल
संवाददाता ने बताया कि, स्मृति ठक्कर की उम्र 23 साल है। बीते रोज ही गुजरात सरकार ने कोरोनोवायरस गंभीर रोगियों के लिए प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन ट्रीटमेंट की शुरूआत की है। ऐसा द् इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर-ICMR Delhi) की स्वीकृति मिलने के बाद किया गया। वहां डॉक्टर ने रिसर्च किया था कि, प्लॉज्मा ट्रांसफ्यूजन ट्रीटमेंट में कोरोना मुक्त हुए रोगी से लिए गए रक्त को यदि किसी अन्य गंभीर कोरोना मरीज के अंदर इंजेक्ट किया जाए तो एंटीबॉडीज उत्पन्न करने में मदद मिलेगी।

फ्रांस गई थीं और वहीं कोरोना ने जकड़ लिया था
ज्ञातव्य है कि, स्मृति ठक्कर मार्च में पेरिस की सैर करके स्वदेश लौटी थीं। यहां तबियत खराब होने पर उन्होंने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। जिसमें वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गईं। जिसके बाद अहमदाबाद के एसवीपी अस्पताल उनका इलाज चला और स्वस्थ होकर घर लौटीं।

लोग बोले- कोरोना वॉरियर है ये बेटी
अब जबकि, उन्होंने कोरोना को मात देकर गुजरात में पहली बार दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान किया है, तो उसके परिजनों ने भी उसका सहयोग किया है। वहीं, लोग भी उनकी तारीफ कर रहे हैं।












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