DDU University News Gorakhpur: अंग्रेज़ी विभाग शुरू करेगा ‘पर्यावरणीय मानविकी' पर वैल्यू एडेड कोर्स

Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा परास्नातक छात्रों और शोधार्थियों के लिए 'पर्यावरणीय मानविकी' पर 15 दिनों का विशेष मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम अक्टूबर के द्वितीय सप्ताह से शुरू किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पर्यावरणीय मुद्दों और मानविकी के बीच के संबंधों पर गहन समझ विकसित कराना है, जिसमें पर्यावरणीय न्याय, जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी और संधारणीय भविष्य ,जल संकट ऊर्जा एवं पर्यावरण , एंथ्रोपोसीन, प्रकृति लेखन जैसे समसामयिक विषय शामिल होंगे।

यह कोर्स मूल रूप से मानविकी विषयों के माध्यम से मानव संस्कृति, साहित्य और पर्यावरण के बीच संबंधों पर चर्चा करेगा। यह पर्यावरणीय मुद्दों के सांस्कृतिक, नैतिक और ऐतिहासिक आयामों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसके माध्यम से पारिस्थितिक संकटों के बारे में आलोचनात्मक सोंच को बढ़ावा देने के लिए साहित्य, दर्शन और कला का सहारा लिया जाएगा।

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विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि यह पाठ्यक्रम हाल ही में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन *"एनवायर्नमेंटल एंड एपोकैलिप्टिक इमेजिनेशन: इकोक्रिटिकल रीडिंग्स इन साउथ एशियन लिटरेचर"* से प्रेरित है, जिसमें पर्यावरणीय और विनाशकारी कल्पनाओं पर विचार-विमर्श किया गया था। इस पाठ्यक्रम में छात्रों को पर्यावरण के साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं के साथ ही पर्यावरणीय सिद्धांतों से भी अवगत कराया जाएगा। इसके माध्यम से यह समझने का प्रयास होगा कि कैसे प्राचीन ग्रंथों, सिद्धांतों और प्रथाओं के माध्यम से मानविकी, पर्यावरण जागरूकता और संरक्षण की दिशा में कार्य कर सकती है। प्रो. शुक्ल ने यह भी बताया कि यह पाठ्यक्रम छात्रों को वैश्विक स्तर पर हो रहे पर्यावरणीय संकटों और उनके सांस्कृतिक प्रभावों को समझने में मदद करेगा।

*कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस पाठ्यक्रम को चलाने की अनुमति देते हुए इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा। वैल्यू एडेड कोर्स के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक संवेदनशीलता आएगी और विषय के प्रति भी छात्रों की अभिरुचि बढ़ेगी।पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आज के समय की आवश्यकता है .प्रो शुक्ला ने बताया कि पाठ्यक्रम में पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी, और केवल रिसर्च स्कॉलर और पीजी छात्र ही इसमें भाग ले सकेंगे।

यह कुल दो क्रेडिट का कोर्स होगा। पर्यावरण और साहित्य के विभिन्न पक्षों को सम्मिलित करते हुए इसमें कुल 15 थीम हैं। कोर्स की मेथोडोलॉजी भी बनाई गई है, जिसके अंतर्गत दो घंटे का प्रतिदिन व्याख्यान एवं विमर्श होगा। प्रेजेंटेशन, क्रिटिकल थिंकिंग, निबंध लेखन , ग्रुप डिस्कशन, लेक्चर रिपोर्ट इत्यादि कार्य भी इसमें सम्मिलित होंगे। अंक के आधार पर प्रमाण पत्र में ग्रेड दिया जाएगा।

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