Indian Railway: इन्दारा-दोहरीघाट रेल मार्ग पर होगा स्पीड ट्रायल, अर्थव्यवस्था को ऐसे मिलेगी रफ्तार
पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मण्डल के इन्दारा-दोहरीघाट खण्ड पर विद्युतीकरण कार्य पुरा हो जाने के बाद ट्रेन का स्पीड ट्रायल किया जायेगा।

Gorakhpur News: पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मण्डल के इन्दारा-दोहरीघाट खण्ड का आमान परिवर्तन एवं विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। रेल संरक्षा आयुक्त, उत्तर पूर्व सर्किल 31 मार्च को इस आमान परिवर्तित एवं विद्युतीकृत रेल खण्ड का निरीक्षण करेंगे तथा स्पीड ट्रायल किया जायेगा।
रेल प्रशासन की आमजन से अनुरोध है कि निरीक्षण एवं स्पीड ट्रायल के दौरान इस आमान परिवर्तित एवं विद्युतीकृत रेल लाइन पर न तो स्वयं जायें, न ही अपने पशुओं को रेलपथ पर जाने दें।
रेलवे द्वारा यात्री सुविधा मेें उन्नयन एवं परिचालनिक सुगमता के लिये आधारभूत संरचना में निरन्तर वृद्धि की जा रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में पूर्वाेत्तर रेलवे के वाराणसी मण्डल के इन्दारा-दोहरीघाट खण्ड का आमान परिवर्तन एवं विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो जाने से यात्री जनता को अनेक लाभ होंगे।
इन्दारा-दोहरीघाट (34.8 किमी.) मीटर गेज रेल खण्ड के आमान परिवर्तन के लिये ₹ 213.35 करोड़ स्वीकृत था, जिसमें आमान परिवर्तन परियोजना का कार्य विद्युतीकरण के साथ पूरा होना था। इस परियोजना को पूरी गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयावधि में पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना के पूर्ण हो जाने से इन्दारा जं. से कोपागंज, घोसी, अमिला एवं दोहरीघाट जाने हेतु बड़ी लाइन रेल मार्ग उपलब्ध होने के साथ ही मेन लाइन से जुड़ जाने से माल एवं यात्री परिवहन की उत्कृष्ट सुविधा क्षेत्रीय जनता को उपलब्ध होगी, जिससे इस क्षेत्र का विकास तीव्र गति से होगा।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों से दलहन के व्यापार के लिये दोहरीघाट एक केंद्र के रूप में स्थापित रहा है। दलहन इस क्षेत्र की प्रमुख उपज रही है। आमान परिवर्तन के फलस्वरूप बड़ी लाइन से कनेक्टिविटी उपलब्ध हो जाने से माल गाड़ियों का संचलन हो सकेगा तथा इस क्षेत्र से दलहन का व्यापार नई ऊँचाईयों को छुयेगा।
कोपागंज, घोसी, अमिला एवं दोहरीघाट क्षेत्र हथकरघा तथा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का क्षेत्र रहा है जो अब तक कृषि उपकरणों एवं फर्टिलाइजर के आयात तथा हथकरघा उत्पादों के निर्यात के लिये मऊ एवं आजमगढ़ पर निर्भर रहा है। मेन लाइन से जुड़ने के साथ ही यह क्षेत्र भी आत्मनिर्भर हो जायेगा। कोपागंज, घोसी, अमिला एवं दोहरीघाट क्षेत्र में निवास करने वाली लगभग 10 लाख जनता को चिकित्सा सेवाओं, उच्च शिक्षा, प्रशासनिक कार्यों एवं नौकरी पेशा कर्मचारियों के लिये आवागमन में बहुत सुविधा होगी साथ ही स्वरोजगार के नये अवसर मिलेंगे तथा बच्चों को उच्च शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा हेतु महानगरों तक आने-जाने में आसानी होगी एवं उनका भविष्य उज्ज्वल होगा।
दोहरीघाट भौगोलिक दृष्टि से सरयू नदी की गोद मे बसा है। यह स्थान श्रद्धालुओं का आकर्षण केन्द्र बना हुआ है तथा समय≤ पर यहाँ मेलों का आयोजन भी होता रहता है। सदियों से गौरवमयी इस स्थान को हरि यानि श्री राम एवं परशुराम की मिलन स्थली जिसको आज दोहरीघाट के नाम से जानते हैं। सरयू के दक्षिणी पूर्वी द्वार पर बसा यह नगर इसलिये भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां 02 किमी. तक सरयू नदी उत्तर दिशा को बहती है। यहाँ बड़े-बड़े महर्षि तपस्वी व संतों ने वर्षों तक साधना की है। यहाँ भगवान श्री राम द्वारा स्थापित ''गौरी शंकर'' का भव्य मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। इन्दारा-दोहरीघाट खण्ड में 02 मेजर ब्रिज, 06 माइनर ब्रिज, 10 सीमित ऊँचाई के सब-वे एवं 08 समपार फाटक हैं।












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