Gorakhpur के निमित अपने स्टॉर्टअप से कमा रहे करोड़ों रुपए, अब PM मोदी ने भी 'मन की बात' में किया जिक्र
गोरखपुर, 31 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 31 जुलाई को 'मन की बात' कार्यक्रम में गोरखपुर के निमित का जिक्र किया। निमित का पीएम द्वारा जिक्र किए जाने के बाद वो चर्चाओं में आ गए है और हर तरफ अब उनकी चर्चा हो रही है। तो वहीं, कुछ लोग ऐसे भी जो निमित सिंह के बारे में जानना चाहते है। तो आइए जानते है कौन हैं निमित सिंह, जिनका पीएम नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में किया हैं जिक्र।

कौन हैं निमित सिंह
निमित सिंह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के दिव्य नगर कॉलोनी निवासी है। निमित बाराबंकी जिले से मधुमक्खी पालन और मुधमक्खीवाला ब्रांड से कई रेंज में शहद का कारोबार करते हैं। निमित सिंह ने 2014 में अन्नामलाई विश्वविद्यालय से मेकेनिकल ट्रेड से बीटेक किया। लेकिन निमित ने नौकरी नहीं, बल्कि खुद का स्टार्टअप शुरू करने का मन बना लिया। इस दौरान निमित के डॉ केएन सिंह ने उन्हें मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित किया।

मधुमक्खी पालन के सीखे तौर तरीके
मधुमक्खी पालन का तरीका सीखने और खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए निमित सिंह सबसे पहले बुनियादी जानकारी हासिल की। इसके लिए निमित ने कई राज्यों का दौरा किया, जहां उन्होंने मधुमक्खी पालने का तौर तरीके सीखा। निमित ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वो सिक्कम, कोलकाता, झारखंड समेत कई राज्यों में गए। निमित की मानें तो मधुमक्खी पालन का तरीका सीखने के दौरान उन्होंने एमबीए की पढ़ाई भी पूरी की।

2016 में शुरू किया मधुमक्खी पालन का स्टार्टअप
निमित की मानें तो उन्होंने 2016 में 50 बॉक्स के साथ मधुमक्खी पालन का स्टार्टअप शुरू किया और शुरुआत में महज 5 हजार रुपए का खर्च आया था। इसके बाद उन्होंने खुद के तैयार शहद को बाजार में उतारा और खुद ही सार्वजनिक स्थानों पर अपने ब्रांड को बेचते थे। अपने ब्रांड के शुद्ध शहद के प्रति लोगों का शानदार रिस्पांस देख निमित ने 2017 में स्टार्टअप को विस्तार देने का फैसला किया। उनके इस फैसले में मददगार बनी मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना। इसके तहत उन्होंने 10 लाख रुपये का लोन लेकर मशीन व अन्य उपकरण स्थापित कर शहद उत्पादन को औद्योगिक रूप दिया।

बाराबंकी में पाली मधुमक्खी और लखनऊ में बनाई लैब
निमित सिंह ने बाराबंकी जिले में मधुमक्खी पालन का बेस लगाया और अपने ब्रांड को और ऊंचाई पर ले जाने के लिए लखनऊ के चिनहट में लैब भी बना ली। निमित बताते हैं कि लखनऊ स्थित लैब में शहद के स्वाद, गुणवत्ता व औषधीय गुणों का नियमित परीक्षण किया जाता है। इतना ही नहीं, निमित मधुमक्खी का पालन ही नहीं करते हैं बल्कि उससे निकले शहद पर निरंतर शोध भी करते हैं। अपने रिसर्च से वह अलग अलग फूलों, फलों वाले आठ प्रकार के स्वाद व मेडिसिनल गुणों वाले शहद को बाजार में उतार चुके हैं।

115 परिवारों को जोड़ा मोम-शहद उत्पादन से
मधुमक्खीवाला ब्रांड के लिए बाजार हेतु उन्होंने किसी मार्केटिंग कंपनी का सहारा लेने के बजाए खुद ही मार्केटिंग की। इतना ही नहीं, निमित ने सिर्फ शहद के कई फ्लेवर ही तैयार नहीं किए, बल्कि इसके बचे मोम से मोमबत्ती, खिलौने, साबुन आदि भी तैयार करते पर है। निमित बतात हैं कि उन्होंने बाराबंकी पुलिस अधिकारी अरविंद चतुर्वेदी की पहल पर चैनपुरवा गांव के 115 ऐसे परिवारों को मोम के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर आजीविका से जोड़ा है। जो कभी शराब के कारोबार व नशे के लिए बदनाम थे। निमित ने बताया कि शुरूआत 5 लाख दीए बनावाए थे।

दो करोड़ का है सलाना टर्नओवर
निमित बताते है कि स्टार्टअप का एक छोटा प्रयास आज सलाना दो करोड़ रुपये के टर्नओवर का रूप ले चुका है। उनके शहद उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक के नेटवर्क में पूरे देश के अंदर 700 लोग रोजगार पा रहे हैं। इतना ही नहीं, निमित्त उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों के अलावा पंजाब, तामिलनाडु, बंगाल, उत्तराखंड व राजस्थान में बेरोजगार युवकों को प्रशिक्षण देकर उनको अपने ब्रांड के नाम से ही शहद बेचने के लिए प्रेरित किया। अब तक वह पांच सौ से अधिक किसानों को इस कार्य से जोड़ चुके हैं।

महज 5 हजार रुपए में शुरु हो सकता है ये स्टॉर्टअप
निमित की मानें तो इस स्टॉर्टअप की शुरुआत महज 5 हजार रुपए से हो सकती है। इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि वो युवाओं को इस स्टॉर्टअप से जोड़ने के लिए कैप भी चलाते है, वो भी नि:शुल्क। निमित ने बातचीत में बताया कि कोई अगर इस बिजनेस को शुरु करता है तो वह शुरुआत में पांच हजार रुपए लगाकर 10 से 15 हजार रुपए तक कमा सकता है।












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