गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक व परास्नातक में जल्द लागू होगी नई शिक्षा नीति,यह है छात्रों की प्रतिक्रिया

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) और सम्बद्ध महाविद्यालयों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में स्नातक, परास्नातक और शोध में नई शिक्षा नीति लागू करने की तैयारी है।

गोरखपुर,22जुलाई: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) और सम्बद्ध महाविद्यालयों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में स्नातक, परास्नातक और शोध में नई शिक्षा नीति लागू करने की तैयारी है। एनईपी लागू होने के बाद अब व्यापक बदलाव दिखेंगे। स्नातक अब चार साल का होगा, उसे पूर्ण करने के बाद विद्यार्थियों को स्नातक (शोध सहित) की उपाधि मिलेगी। इन कक्षाओं के लिए नए सिरे से पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।इस नई शिक्षा नीति को लेकर जहां कुछ छात्रों ने इसे बढ़िया बताया है तो कुछ ने इसे गरीब विद्यार्थियों पर बोझ बताया है।

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गरीब विद्यार्थियों पर बोेझ
बीएएलएलबी के छात्र नारायण दत्त पाठक ने बताया कि नई शिक्षा नीति में फीस में भारी बढ़ोत्तरी की गई है जो विद्यार्थियों पर बोझ है।एक तरफ सरकार नीति में परिवर्तन कर रही है और दूसरी तरफ छात्र नौकरी के लिए परेशान हैं। दस लाख से ज्यादा बेरोजगारों पर सरकार एक हजार भर्ती करती है। मेरा मानना है नीति में परिवर्तन के बजाय विद्यार्थियों के लिए रोजगार पर और योजना बनाएं।

छात्रों के साथ हो रहा एक्सपेरीमेंट
बीएम प्रथम वर्ष के साथ ह्रदयेश ने कहा कि ऐसा लग रहा है मानो हम सभी के साथ प्रयोग किया जा रहा है।
हर दो माह में नई चीजे लाई जा रही है।हम सभी का कोर्स कम्पलीट नहीं होता है और सेसन खत्म हो जाता है।

अच्छी है शिक्षा नीति
बीए के छात्र पंकज ने नई शिक्षा नीति को बेहतर बताया है।उन्होंने कहा यह नीति छात्रों के हित में है।और बेहतर भविष्य का निर्माण होगा।

माह के अंत तक नए पाठ्यक्रम पर लगेगी मुहर
इस माह के अंत तक सभी पाठ्यक्रमों पर मुहर लग जाने की उम्मीद है। इसके लिए सभी विभागाध्यक्षों को जल्द से जल्द बोर्ड ऑफ स्टडीज से पाठ्यक्रम तैयार कराकर सक्षम निकायों से पारित कराने का निर्देश दिया गया है।

नई शिक्षा नीति के फायदे अब तक विद्यार्थी एक या दो साल स्नातक की पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते थे तो उनका उतना समय बर्बाद हो जाता था। अब ऐसा नहीं होगा। मान लीजिए, विद्यार्थी ने स्नातक में एक साल किया और आगे नहीं पढ़ा तो उसे सर्टिफिकेट ऑफ बैचलर मिलेगा।दो साल पूर्ण होने के बाद पढ़ाई छूटने पर डिप्लोमा इन बैचलर मिलेगा। तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी होने के बाद पढ़ाई छोड़ने पर पहले की ही तरह स्नातक उपाधि मिलेगी। उसके बाद वह परास्नातक कर सकता है। स्नातक चौथे वर्ष में प्रवेश सिर्फ उन्हें ही मिलेगा, जिनका कुल ग्रेड प्वाइंट 7.5 सीजीपीए होगा। चार वर्ष का स्नातक कोर्स पूर्ण होने पर स्नातक शोध की उपाधि मिलेगी।

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