गोरखपुर : विश्व के पहले राज-गिद्ध का लोकार्पण करेंगे सीएम योगी,जानिए क्या है इसकी खासियत
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर वन प्रभाग में स्थित महराजगंज के फरेंदा में निर्मित हो ‘रेड हेडेड व्लचर प्रजनन एवं संवर्धन' केंद्र का लोकार्पण 3 सितंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा।

गोरखपुर,17 जुलाई : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर वन प्रभाग में स्थित महराजगंज के फरेंदा में निर्मित हो 'रेड हेडेड व्लचर प्रजनन एवं संवर्धन' केंद्र का लोकार्पण 3 सितंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा। इसके लिए 1.06 करोड़ रुपये का और बजट जारी किया गया है।साल 2021 में इस प्रोजेक्ट पर अब तक 80.24 लाख रुपये की धनराशि से तमाम निर्माण कार्य और जरूरी उपकरण खरीदे जा चुके हैं।
राज गिद्धों का होगा संरक्षण
यहां पहले चरण में तीन जोड़ी राज गिद्ध लाए जाएंगे। यह कार्य यूपी सरकार बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के साथ मिलकर करेगी। भारत में वर्तमान में असम, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सहित कुल चार जगहों पर गिद्धों के प्रजनन एवं संवर्धन केंद्र खोले गए हैं। लेकिन इनमें से कोई भी राज गिद्ध के लिए नहीं है।
खर्च होंगे 35 करोड़ रुपए
यह राज गिद्धों के प्रजनन केंद्र के रुप में विकसित किया जा रहा है। राज गिद्ध के संवर्धन के लिए यूपी सरकार 15 वर्षों में 35 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है, जिसकी पहली किश्त के रूप में सात करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए गए हैं।
बढ़ेगी राज गिद्धों की संख्या
इस केंद्र में ओबरी रूम के साथ अस्पताल, लैब और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।इसके साथ ही गिद्धों की संख्या में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
तीन चरणों में है तैयारी
यूपी में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट जटायु के तहत जो तैयारी की गई है, उसको तीन चरणों में बांटा गया है। वर्ष 2022-23 में सात जोड़ी राज गिद्ध इस केंद्र में लाए जाएंगे। उसके बाद वर्ष 2023-24 में दो जोड़ी और राज गिद्ध लाए जाएंगे। इस केंद्र में गिद्धों की संख्या बढ़ाने का कार्य किया जाएगा।जानकारी के मुताबिक, 12 जोड़ी गिद्धों से 15 सालों में इनकी संख्या 150 से 180 के बीच हो जाएगी। वर्तमान में यूपी के तराई वाले 18 जिलों में उनकी संस्था राज गिद्धों के संवर्धन पर कार्य कर रही है।
यह होंगी सुविधाएं
गिद्धों में चार तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं। एक सफेद पीठ वाला, दूसरा लंबी चोंच वाला गिद्ध, तीसरा पतली चोंच वाला होता है। इन सबके जो राजा होते हैं, उनको राज गिद्ध कहते हैं। इनकी गर्दन लाल होती है। इसी प्रजाति के गिद्ध राज जटायु का रामायण में वर्णन किया गया है।किसी जानवर के मरने पर पहली चोंच मारकर मृत शरीर को खोलने का कार्य गिद्धराज करते हैं। उसके बाद बाकी की गिद्ध प्रजाति मरे जानवरों को खाने का कार्य करते हैं। यूपी में खुलने वाला गिद्ध संवर्धन और प्रजनन केंद्र सिर्फ राज गिद्ध के लिए शुरू किया जा रहा है। सरकार ने इसीलिए इस प्रोजेक्ट को सेव जटायु की श्रेणी में रखा है।












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