'चौरी चौरा कांड नहीं ऐतिहासिक घटना बोलिए..', डीडीयू के प्रोफेसर ने बताया कैसे अंग्रेजों के मन में आया खौफ

Special Ground Report On Chauri Chaura Gorakhpur Independence Day 2024: उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा घटना को लेकर तमाम इतिहासकारों ने अपना अलग अलग मत दिया। किसी ने इसे चौरी चौरा कांड कहा तो किसी ने इसे चौरी चौरा ऐतिहासिक घटना । वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के इतिहास विभाग के हेड प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी से खास बातचीत की। इस दौरान प्रोफेसर तिवारी ने चौरी चौरा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई।

चौरी चौरा कांड नहीं ऐतिहासिक घटना बोलिए

प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि सबसे पहले एक बात बता दूं इसे चौरी चौरा कांड न कहकर चौरी चौरा की ऐतिहासिक घटना कहना उचित है। तभी इसका सम्मान होगा।

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पहले 5 फरवरी, 1922 की तिथि बताई जाती थी

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    प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि कुछ समय पहले इस घटना की तिथि 5 फरवरी, 1922 बताई जा रही थी। बहुत सारी परीक्षाओं में भी 5 फरवरी, 1922 को ही सही माना जाता रहा। विपिन चंद्रा सहित तमाम बड़े इतिहासकारों ने इस घटना की तिथि भी 5 फरवरी ही बताई।

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    डीडीयू के इतिहास विभाग ने की यह खास पहल

    प्रोफेसर मनोज तिवारी ने कहा कि जब चौरी चौरा शताब्दी वर्ष मनाया गया उससे एक डेढ़ साल पहले डीडीयू के इतिहास विभाग ने एक व्यापक सेमिनार आयोलोजित किया था। जो उस समय हेड रहे प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी के देख रेख में था। उन्होंने इस पर गहन अध्ययन किया। जिसे एक किताब के रूप में पब्लिश किया और उसमे यह लिखा कि चौरी चौरा घटना 5 फरवरी नहीं बल्कि 4 फरवरी को हुई थी। जिसे आज सभी लोग मान रहे हैं।

    अंग्रेजों के मन में भर दिया खौफ
    प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि यह पहली ऐसे घटना थी जिसने अंग्रेज़ो के मन में खौफ पैदा कर दिया। इस घटना ने यह बता दिया कि अब भारत के लोग डर के नही रह सकते।

    जलियावाला बाग कांड का प्रति उत्तर था चौरी चौरा घटना

    प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि चौरी चौरा की घटना जलियांवाला बाग कांड का प्रति उत्तर था।

    नए चरण का क्रांतिकारी आंदोलन

    प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि चौरी चौरा की घटना ने आजादी की लड़ाई को नई दिशा और गति प्रदान की। इसके बाद देश में नए चरण के क्रांतिकारी आंदोलन की शुरुआत होती है।

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