गोरखरपुर: आखिर क्यूं चित्रकूट के सुदंरवन से ही लाया जाएगा जटायु का पहला जोड़ा,जानिए क्या है महत्व

गोरखपुर वन प्रभाग के महराजगंज जिले में स्थित भारीवैसी में बनाए जा रहे जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में चित्रकूट के सुदंरवन के दो जटायु लाए जाएंगे।प्रशासन ने इसकी तैयारी कर ली है एंव इस संरक्षण केंद्र में हो रहे कार्य

गोरखपुर,10 अगस्त: गोरखपुर वन प्रभाग के महराजगंज जिले में स्थित भारीवैसी में बनाए जा रहे जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में चित्रकूट के सुदंरवन के दो जटायु लाए जाएंगे।प्रशासन ने इसकी तैयारी कर ली है एंव इस संरक्षण केंद्र में हो रहे कार्य को तीव्र गति देने के लिए बजट भी पास कर दिया गया है।चित्रकूट से जटायु लाने का ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व है।इन्ही जंगलों में रावण और जटायु का युद्ध हुआ था।

jatayu

जटायु का है पौराणिक महत्व
जब रावण सीता को हरण कर ले जा रहा था तब जटायु नामक गिद्ध ने उसे रोकने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। रावण ने उसके पर काट दिए जिससे वो जमीन पर आ गिरा, मरते मरते उसने प्रभु श्री राम को रावण द्वारा किये सीता हरण के बारे में बताया। प्रभु राम ने जटायु को अपने सीने से लगाया और उसी वक़्त जटायु को स्वर्ग प्राप्ति हुई।इस जटायु को भले ही भगवान राम ने सीने से लगाया हो परन्तु इंसान आज भी इसके वंशजों को घृणा की दृष्टि से देखता है। अगर वे घर आदि पर बैठे दिख गए तो उस घर को त्याग दिया जाता है अथवा उसकी पूजा पाठ द्वारा शुद्धि की जाती है।

पर्यावरण में महत्वपूर्ण भूमिका
पर्यावरण के संतुलन बनाये रखने के लिए हर प्राणी का प्रकृति में एक विशेष महत्व है, परन्तु इस सन्दर्भ गिद्धों की एक अलग ही भूमिका है। गिद्धों को खाद्य श्रृंखला में शीर्ष स्थान प्राप्त है। गिद्ध मृत प्राणियों के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह ये अप्रतक्ष्य रूप से मनुष्यों की सहायता करते हैं एवं कई तरह की गंभीर संक्रामक बीमारियों से मनुष्यों की सुरक्षा करते हैं।

महराजगंज जिले में स्थित भारीवैसी में जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र बनाया जा रहा है। इसके निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए शासन की तरफ से दो किस्तों में 1.86 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। पांच हेक्टेयर में बन रहे जटायु केंद्र के लिए बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और प्रदेश सरकार के बीच 15 साल के लिए समझौता किया गया है।

डीएफओ विकास यादव ने बताया कि हमारी तैयारी है कि चित्रकूट के सुंदरवन से जटायु के पहले जोड़े को जटायु संरक्षण केंद्र में लाया जाए। सितंबर के पहले सप्ताह में तीन तारीख को अंतरराष्ट्रीय जटायु जागरूकता दिवस मनाया जाता है। तैयारी है कि जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र का निर्माण तीन सितंबर तक पूरा कर लिया जाए।

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