DDU University ने राष्ट्रीय स्तर पर हासिल की बड़ी उपलब्धि, इस वजह से मिला ‘पर्यावरण चैंपियन पुरस्कार 2025'

DDU University Gorakhpur Latest News Hindi Uttar Pradesh: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उसके उत्कृष्ट योगदान और बहुआयामी पहलों के लिए वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित 'पर्यावरण चैंपियन पुरस्कार' (Environment Champion Award 2025) प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान संस्थान को 'चैंपियन इंस्टीट्यूशन फॉर नेचर (समग्र उत्कृष्टता)' श्रेणी में चयनित कर प्रदान किया जा रहा है।

यह पुरस्कार भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से प्रायोजित है। समारोह का आयोजन 5 जून 2025, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में किया जाएगा।

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🌿 पुरस्कार चयन की प्रक्रिया

इस राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु पूरे भारतवर्ष से पाँच श्रेणियों में नामांकन आमंत्रित किए गए थे:
1. रिवर गार्डियन (नदी संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान)
2. वन्यजीव योद्धा (Wildlife Warriors)
3. ग्रीन फ्रंटलाइनर्स (स्वयंसेवक/अभियानकर्ता)
4. इको समरिटन्स (प्रकृति के लिए सामाजिक सेवा)
5. चैंपियन इंस्टीट्यूशन फॉर नेचर (संस्थान स्तर पर समग्र उत्कृष्टता)

इन श्रेणियों में प्राप्त सैकड़ों नामांकनों में से दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान का चयन सर्वश्रेष्ठ संस्थागत योगदान के लिए किया गया।

🌱 संस्थान के प्रमुख कार्य और योगदान

संस्थान ने बीते वर्षों में निम्नलिखित क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है:

🔹 प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने हेतु किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्थानीय अनाजों को पुनर्स्थापित करने के प्रयास।
🔹 जल संरक्षण के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, नहरों/तालाबों की सफाई और संरक्षण।
🔹 वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत प्रति वर्ष 10,000 से अधिक पौधों का रोपण एवं संवर्धन।
🔹 वेटलैंड संरक्षण एवं पक्षी संरक्षण पर आधारित कार्यशालाएँ और क्षेत्रीय सर्वेक्षण।
🔹 किसान एक्सपो, 'श्री अन्न मेला' और पर्यावरण विषयक संगोष्ठियों का आयोजन, जिसमें किसानों, छात्रों और विशेषज्ञों की सहभागिता।
🔹 स्थानीय जैवविविधता का दस्तावेजीकरण और इसके संरक्षण हेतु सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहन।

🎙️ कुलपति प्रो. पूनम टंडन का संदेश

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने संस्थान को बधाई देते हुए कहा:

"यह पुरस्कार हमारे विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह न केवल हमारे सतत पर्यावरणीय प्रयासों की राष्ट्रीय मान्यता है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि अकादमिक संस्थान भी धरती और प्रकृति के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभा सकते हैं। मैं संस्थान के सभी संकाय सदस्यों, छात्रों और कर्मचारियों को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हृदय से शुभकामनाएं देती हूं। उन्होंने परिसर और समुदाय दोनों को हरित एवं सतत बनाने की दिशा में असाधारण योगदान दिया है।"

🏅 पूर्वांचल के लिए गर्व का विषय

संस्थान को मिला यह सम्मान न केवल दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि पूर्वांचल क्षेत्र के लिए भी अत्यंत गौरव का क्षण है। यह उपलब्धि शिक्षा, विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के संगम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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