DDU University: एनईपी 2020 सेंसिटाइज़ेशन कार्यक्रम में शिक्षा और मूल्यों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
DDU University Gorakhpur News Uttar Pradesh: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (MMTTC) द्वारा आयोजित 11वें ऑनलाइन "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम" के चौथे दिन दो सत्रों का आयोजन हुआ, जिनमें शिक्षा, मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे NEP 2020 के महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन विमर्श हुआ।
प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. अवधेश कुमार (हिंदी विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा महाराष्ट्र ) ने "भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आदर्श शिक्षक ही ज्ञान परंपरा और सभ्य समाज का संवाहक होता है। पहली बार नयी शिक्षा नीति में समग्रता के साथ पाठ्यचर्या, समावेशी शिक्षा और मूल्यांकन पद्धति के साथ 64 कलाओं की चर्चा की गई है, जो भारत को 21वीं सदी का सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने आगे कहा कि हमारी परंपरा में त्याग और कर्म को सर्वोपरि माना गया है। जब दृष्टिकोण बदलता है तो पूरी सृष्टि बदल जाती है। शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब वह व्यक्ति को नर से नारायण बनने की दिशा में अग्रसर करती है।
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. बी. एन. दूबे (समाजशास्त्र विभाग, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ) ने कहा कि "नई शिक्षा नीति शिक्षा में समग्र विकास, आलोचनात्मक सोच, समावेशिता और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इसका लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 50% और 2030 तक प्राथमिक शिक्षा में 100% करना है। यह नीति भारत को वैश्विक स्तर पर कुशल जनशक्ति का केंद्र बनाने और एक नैतिक, सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित न्यायसंगत समाज के निर्माण की दिशा में अग्रसर करती है।उन्होंने कहा कि ईश्वरीय पूर्णता की अभिव्यक्ति ही शिक्षा का सही अर्थ है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. अजय कुमार शुक्ला, पूर्व विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, ने कहा कि "शिक्षा व्यक्ति के जन्मजात गुणों को उजागर करने की प्रक्रिया है, जो उसे अपने सर्वोत्तम संस्करण में परिवर्तित करती है। अतः शिक्षा का मूल उद्देश्य अच्छे नैतिक चरित्र का विकास करना है। NEP 2020 इसी प्रकार का चरित्रनिष्ठ और मूल्यपरक शिक्षा तंत्र स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है।उन्होंने कहा यह कार्यक्रम कुलपति प्रो पूनम टंडन की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में एनईपी की अवधारणाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए आयोजित की गई है .
सह-संयोजक प्रो. मनीष पांडेय ने कहा कि शिक्षा जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य का स्वभाव है कि वह निरंतर सीखता रहे और अपनी मानसिक परिकल्पना को आगे बढ़ाता रहे।
विभिन्न सत्रों में स्वागत एवं आभार ज्ञापन प्रीति कुमारी, जेहरा शमशीर, खुशबू जायसवाल, नितेश सिंह एवं सुरभि मालवीय द्वारा किया गया। तकनीकी सहयोग विशाल मिश्रा द्वारा प्रदान किया गया। रिपोर्टिंग का कार्य कुशलता के साथ अरुण मिश्रा द्वारा किया गया .इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 60 से अधिक शिक्षक और शोधार्थी सहभागी बने।












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