DDU University Gorakhpur: भारत की पड़ोसी प्रथम नीति पर कुलपति ने कहीं ये खास बातें
DDU University Gorakhpur Latest News Uttar Pradesh: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग द्वारा तथा ICWA के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 26 जुलाई को " भारत की पड़ोसी प्रथम नीति: चुनौतियां एवं विकल्प" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो पूनम टंडन ने किया।
कुलपति प्रो पूनम टंडन ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की पड़ोसी प्रथम नीति में आर्थिक एवं सामरिक सहयोग के साथ साथ अकादमिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक सहयोग का महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। गोरखपुर विश्वविद्यालय भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है और अपने पड़ोसी देशों जैसे नेपाल के साथ विभिन्न अकादमिक सहयोगों जैसे पोखरा एवं त्रिभुवन विश्वविद्यालय के साथ साझा सेमिनार एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना और इसके साथ ही योग दिवस के अवसर पर योगबंधन कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यक्रम में 15 से अधिक राष्ट्रों ने प्रतिभाग किया, यह दिशा में एक महत्वपूर्ण होती है।
इस सत्र के मुख्य अतिथि प्रो श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी, पूर्व कुलपति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, ने कहा कि भारत की पड़ोसी प्रथम नीति एक समय सापेक्ष, सुविचारित एवं सुविकसित नीति है। भारत की इस नीति का प्रमुख आधार अनाक्रमण,अहस्तक्षेप व शांतिपूर्ण सहअतित्व पर आधारित है और इस नीति के द्वारा भारत अपने सभी पड़ोसी राष्ट्रों के सहयोग एवं विकास में साझीदार बन रहा हैक्योंकि शान्त एवं स्थिर पड़ोस भारत के आर्थिक विकास एवं उन्नति की प्रमुख आवश्यकता है। भारत की इस नीति के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में चीन का बढ़ता प्रभाव एवं विभिन्न राष्ट्रों के मध्य विद्यमान सीमा विवाद इसके समक्ष मुख्य चुनौतियां हैं। इस सत्र के विशिष्ट अतिथि प्रो हरि सरन, पूर्व प्रतिकुलपति दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान 21वीं शताब्दी में अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य बहुत तेजी से परिवर्तित हो रहा है और इस दौर में विश्व पटल पर भारत एवं चीन दोनों को नजरअंदाज करना नामुमकिन है क्योंकि संपूर्ण विश्व में दक्षिण एशिया ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां तीन नाभिकीय शक्ति संपन्न राष्ट्र आपस में सीमा साझा करते है। इसलिए भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के दक्षिण एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव एक प्रमुख चुनौती है जिससे निपटने के लिए भारत को बहुआयामी प्रयास की आवश्यकता है जैसे आर्थिक विकास पर जोर देना, सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना आदि।
इस सत्र में मुख्य वक्ता प्रो मीना दत्ता पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ ने भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के विभिन्न आयामों का विस्तृत उल्लेख किया और इस तात्कालिक आवश्यकता बताया जिसके लिए दूरदर्शी नेतृत्व, शसक्त रणनीति एवं दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। इस सत्र का आभार ज्ञापन संगोष्ठी की आयोजन सचिव डॉ आरती यादव ने किया एवं स्वागत उद्बोधन संगोष्ठी के संयोजक प्रो विनोद कुमार सिंह ने किया। उद्घाटन सत्र के पश्चात आज दो तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. आर एन सिंह पूर्व अध्यक्षरक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर, मुख्य अतिथि प्रो. ओम प्रकाश सिंह प्राचार्य दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज गोरखपुर तथा मुख्य वक्ता प्रो. कमल किंगर, अध्यक्ष रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला रहे तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने किया जबकि द्वितीय तकनीकी सत्र के अध्यक्षता प्रो. प्रदीप कुमार यादव पूर्व अध्यक्ष रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर ने किया व मुख्य अतिथि प्रो. असीम सत्यदेव पूर्व प्राचार्य संत विनोबा भावे पीजी कॉलेज देवरिया एवं इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. बलवंत सिंह (अवकाश प्राप्त) रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग विभाग भटौली महाविद्यालय गोरखपुर और विशिष्ट अतिथि विशाल दुबे सीनियर कमांडेंट डीआईजी सीआईएसफ रहे। इन दोनों तकनीकी सत्रों में कुल 12 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण शोध छात्रों द्वारा किया व इस दौरान विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो सतीश चंद्र पांडेय, प्रो श्री निवास मणि त्रिपाठी, डॉ प्रवीण कुमार सिंह, डॉ जितेंद्र कुमार, डॉ विजय कुमार, डॉ अभिषेक सिंह, डॉ डी के पाटिल महाराष्ट्र एवं विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के शिक्षकगण, विभिन्न महाविद्यालयों से आए शिक्षक गण, देश के अलग अलग प्रदेशों से आए प्रतिभागी व विभाग के शोध छात्र छात्राएं एवं परास्नातक व स्नातक के छात्र उपस्थित रहे।












Click it and Unblock the Notifications